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CM Hemant Soren की अध्यक्षता में झारखंड राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की पहली बैठक, 2119 संभावित वेटलैंड का होगा सत्यापन

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CM Hemant Soren: झारखंड में प्राकृतिक जल क्षेत्रों और जैव विविधता के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में 24 अगस्त को झारखंड मंत्रालय, रांची में झारखंड राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की पहली बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य की आर्द्रभूमियों के संरक्षण, पहचान, सीमांकन, नोटिफिकेशन और वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राज्य में मौजूद आर्द्रभूमियों को चिन्हित करने, उनका विस्तृत अध्ययन कराने और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वेटलैंड केवल जल क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि राज्य की जैव विविधता, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

2119 संभावित वेटलैंड का होगा भौतिक सत्यापन

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इसरो से प्राप्त एटलस के आधार पर झारखंड में 2119 संभावित आर्द्रभूमियों की सूची प्राप्त हुई है। अब इन सभी संभावित स्थलों का जिला स्तर पर भौतिक और तथ्यात्मक सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए जिला स्तरीय आर्द्रभूमि समितियां संबंधित क्षेत्रों का अध्ययन करेंगी।

मुख्यमंत्री ने राज्य की सभी आर्द्रभूमियों की सूची तैयार करने और उसे समय-समय पर अपडेट करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही आर्द्रभूमियों से जुड़ा एक व्यवस्थित डेटाबेस विकसित करने और उसका नियमित रखरखाव करने पर भी जोर दिया गया।

सत्यापन के बाद चिन्हित आर्द्रभूमियों की सीमांकन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके पश्चात सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए संबंधित वेटलैंड का नोटिफिकेशन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य संभावित वेटलैंड की पहचान से लेकर सत्यापन, सीमांकन, अधिसूचना, दस्तावेजीकरण और प्रबंधन योजना तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है।

CM Hemant Soren: संरक्षण के लिए तैयार होगा मैनेजमेंट प्लान

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए केवल उनकी पहचान और सीमांकन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी मौजूदा स्थिति और आसपास की गतिविधियों का भी विस्तृत अध्ययन जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को जल स्रोतों, आसपास होने वाली गतिविधियों और समय के साथ आर्द्रभूमियों में आए बदलावों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में आर्द्रभूमि नियमों के प्रभावी पालन, अतिक्रमण की रोकथाम और वेटलैंड क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों के नियमन पर भी चर्चा हुई। जिला स्तरीय समितियों द्वारा सत्यापन के बाद रिपोर्ट राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण को भेजी जाएगी। इसके आधार पर राज्य स्तरीय समिति पहचान और सीमांकन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देगी।

प्रमुख आर्द्रभूमियों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग मैनेजमेंट प्लान तैयार किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि प्राकृतिक जल निकायों के संरक्षण और जीर्णोद्धार से राज्य के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने के साथ जल संकट से निपटने में भी मदद मिल सकती है।

बैठक में झारखंड राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के प्रभावी संचालन को लेकर भी कई प्रस्तावों पर विचार किया गया। इनमें टेंडर और प्रोक्योरमेंट दस्तावेजों की स्क्रीनिंग तथा टेंडर अनुमोदन के लिए समिति का गठन, तकनीकी समिति का गठन और जनता से प्राप्त शिकायतों की सुनवाई के लिए समिति बनाने जैसे प्रस्ताव शामिल रहे।

इसके अलावा प्राधिकरण के कार्यालय संचालन के लिए पर्याप्त बजट, आवश्यक वित्तीय संसाधन और मानव संसाधन उपलब्ध कराने तथा आर्द्रभूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार समेत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, नगर विकास, राजस्व, वित्त, ग्रामीण विकास और पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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