रिपोर्ट: प्रवीण वाने
परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम
Burhanpur : मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक नगरी बुरहानपुर में मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का विशेष उत्सव है। यहां पतंगबाजी सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि धार्मिक विश्वास से जुड़ी हुई है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बुरहानपुर की फिजाओं में उड़ती पतंगें श्रद्धा और उल्लास का प्रतीक बन जाती हैं।

स्वामीनारायण मंदिर में भगवान ने उड़ाई पतंग
Burhanpur बुरहानपुर के प्राचीन स्वामीनारायण मंदिर में मकर संक्रांति पर भगवान श्री स्वामीनारायण और लक्ष्मी नारायण देव को प्रतीकात्मक रूप से पतंग उड़ाते हुए दर्शाया गया। इस वर्ष पतंग पर लिखा संदेश — “अभ्युदय मध्य प्रदेश” विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। रंग-बिरंगी पतंगों, ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंज उठा।

समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य का संदेश
Burhanpur मंदिर के महंत चिंतन प्रियदासजी ने बताया कि मकर संक्रांति पर भगवान द्वारा पतंग उड़ाने की परंपरा वर्षों पुरानी है, जिसकी मान्यता रामायण काल से जुड़ी मानी जाती है। इस वर्ष “अभ्युदय मध्य प्रदेश” का संदेश देकर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य, समृद्धि और विकास की कामना की गई। इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बनने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु बुरहानपुर पहुंचे।
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