केरल: दिमाग खाने वाले अमीबा के बढ़ते मामले, 19 मौतों से हिली सरकार

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by: vijay nandan

दुर्लभ बीमारी से मचा हड़कंप

केरल में दिमाग खाने वाले अमीबा (अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस) के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। यह संक्रमण मस्तिष्क में गंभीर सूजन पैदा करता है और अब तक 19 लोगों की जान ले चुका है। वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बीमारी के प्रसार पर ठोस जवाब देने में जुटे हैं, वहीं सरकार पर पर्याप्त कदम न उठाने के आरोप लग रहे हैं।

संक्रमण के प्रमुख मामले

तीन महीने के शिशु से लेकर 52 वर्षीय व्यक्ति तक, अलग-अलग आयु वर्ग के लोग इस बीमारी की चपेट में आए हैं। हाल ही में तिरुवनंतपुरम की लताकुमारी की मौत के बाद यह मुद्दा और गरमाया। राज्य विधानसभा में विपक्ष ने इसे लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया और स्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामी बताई।

विपक्ष के आरोप

कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने आरोप लगाया कि ठहरे हुए या दूषित पानी के संपर्क में आने वाले लोगों को सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने में लापरवाही बरती है। साथ ही पीलिया, डेंगू, टाइफाइड और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी अन्य बीमारियों के बढ़ते मामलों का भी जिक्र किया।

वैश्विक स्तर पर बेहद दुर्लभ

प्राथमिक अमीबा मेनिंगोएन्सेफलाइटिस दुनियाभर में बेहद दुर्लभ है। अब तक विश्व स्तर पर इसके 500 से भी कम मामले दर्ज किए गए हैं। इसके विपरीत, केरल में ही 120 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 68 सिर्फ इसी साल रिपोर्ट हुए हैं। संक्रमण तब होता है जब दूषित ताजे पानी के कण नाक के जरिए मस्तिष्क तक पहुंचते हैं और वहां के ऊतकों को नष्ट कर देते हैं।

सरकार की कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान एक शिशु और एक महिला की मौत हो चुकी है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मरीजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोग की जाने वाली दवा मिल्टेफोसिन सहित हर संभव इलाज दिया गया। राज्य सरकार ने “जलमनु जीवन” नामक अभियान की शुरुआत की है, जिसके तहत कुओं, तालाबों और स्विमिंग पूल में क्लोरीनीकरण किया जा रहा है।

15 दिन में 8 मौतें

विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने कहा कि केवल 15 दिनों में 8 लोगों की मौत हो गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रोटोकॉल क्या है और लोग खुद को कैसे बचाएं? उन्होंने यह भी पूछा कि एक बच्चा संक्रमित कैसे हुआ – क्या वह स्विमिंग पूल में था?

सरकार की सफाई

स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने विपक्ष के आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा कि कांग्रेस स्वास्थ्य क्षेत्र को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार निगरानी और इलाज की व्यवस्था मजबूत कर रही है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बहस

विपक्ष ने आरोप लगाया कि केरल की स्वास्थ्य व्यवस्था “वेंटिलेटर पर” है। उनका कहना है कि 2016-17 में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर जेब से होने वाला खर्च 5,419 रुपये था, जो अब 7,889 रुपये तक पहुंच गया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार मौतों के बाद ही कदम उठाती है, पहले से कोई तैयारी नहीं होती।

अमीबा क्या है?

  • अमीबा (Amoeba) एक सूक्ष्मजीव (माइक्रोऑर्गेनिज़्म) है, जो पानी और नम वातावरण में पाया जाता है।
  • यह एककोशिकीय (single-celled) जीव है, यानी इसका पूरा शरीर सिर्फ एक ही कोशिका से बना होता है।
  • यह अपने आकार को बदलकर चलता है और भोजन ग्रहण करता है।

प्रकार

सामान्य तौर पर अमीबा हानिरहित होते हैं और तालाब, झील, नालों या गीली मिट्टी में रहते हैं।
लेकिन कुछ प्रजातियां (जैसे नेग्लेरिया फाउलेरी – Naegleria fowleri) इंसानों के लिए खतरनाक होती हैं।

खतरनाक अमीबा: दिमाग खाने वाला अमीबा

  • नेग्लेरिया फाउलेरी नामक अमीबा को आमतौर पर “दिमाग खाने वाला अमीबा” कहा जाता है।
  • यह नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है (जैसे दूषित तालाब या स्विमिंग पूल के पानी से) और मस्तिष्क तक पहुंचकर वहां संक्रमण करता है।
  • इस संक्रमण को अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (Primary Amoebic Meningoencephalitis – PAM) कहा जाता है।
  • यह बेहद दुर्लभ लेकिन जानलेवा बीमारी है।

सुरक्षित रहने के उपाय

  • दूषित या ठहरे हुए पानी में नाक-चेहरा डालने से बचें।
  • स्विमिंग पूल या टैंक को नियमित रूप से क्लोरीनीकरण करें।
  • स्वच्छ और फ़िल्टर किया हुआ पानी इस्तेमाल करें।

केरल में दिमाग खाने वाले अमीबा का संक्रमण राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। यह दुर्लभ और घातक बीमारी रोकथाम, जागरूकता और त्वरित इलाज के जरिए ही काबू में लाई जा सकती है। विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को स्वच्छ पानी और सतर्कता के प्रति जागरूक करना सबसे जरूरी है।