प्रमोद श्रीवास्तव, विशेष संवाददाता
Uttar Pradesh Election 2027 : लखनऊ, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।ऐसे में विभिन्न सर्वे और फीडबैक रिपोर्टों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।उधर चुनावी तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी के आंतरिक फीडबैक और संगठनात्मक सर्वे ने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर सर्वे किया गया है।इसमें जनता से मौजूदा विधायकों के कामकाज, क्षेत्र में उनकी सक्रियता, विकास कार्यों और जनसंपर्क को लेकर राय ली गई।दावा किया गया कि कई सीटों पर लोगों ने मौजूदा विधायक को दोबारा टिकट देने के पक्ष में सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी।
Uttar Pradesh Election 2027 : ‘2027- मिशन’, सर्वे ने बढ़ाई टेंशन, सर्वे में 35% सीटों पर BJP को नुकसान
सर्वे में कई जगह एंटी-इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी माहौल सामने आने का दावा किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, कई क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं की नाराज़गी, स्थानीय स्तर पर संगठन की सक्रियता और सरकार के प्रति जनता की धारणा को लेकर मिले संकेतों ने पार्टी नेतृत्व को सतर्क किया है।सर्वे रिपोर्ट में लोगों की नाराजगी को 2 तरह से बांटा गया है। पहली कैटेगरी में सरकार यानी केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से नाराजगी को रखा गया है। दूसरी कैटेगरी में विधायकों के लिए गुस्से को रखा गया। हालांकि पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन चुनाव से पहले भाजपा की ओर से कराए गए आंतरिक सर्वे में पार्टी को बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा हालात में अगर चुनाव हुए, तो भाजपा को बहुमत के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।
भाजपा को यहां सीधे तौर पर 52 से 67 सीटों का नुकसान हो सकता है। भाजपा को 190 से 205 सीटें मिल रही हैं। जबकि बहुमत के लिए 202 सीटें चाहिए। उधर सर्वे करने वाली एजेंसी ने इस नुकसान से बचने के लिए सुझाव भी दिए हैं। इसके लिए पार्टी को अपने मौजूदा 35 % विधायकों के टिकट काटने होंगे।पूर्वांचल में विधायकों को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले नेशन विद नमो एजेंसी से सर्वे कराया। यह एक रजिस्टर्ड संस्था है। भाजपा के लिए पॉलिटिकल सर्वे करती है। जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले सभी दल अपने-अपने स्तर पर फीडबैक और सर्वे कराते हैं। यदि किसी सीट पर लगातार नकारात्मक संकेत मिलते हैं तो उम्मीदवार बदलने का फैसला भी लिया जा सकता है। हालांकि टिकट किसे मिलेगा, इसका अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व ही करता है।
Uttar Pradesh Election 2027 : सर्वे रिपोर्ट में लोगों की नाराजगी
सर्वे रिपोर्ट में लोगों की नाराजगी को 2 तरह से बांटा गया है।
पहली कैटेगरी में सरकार यानी केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से नाराजगी।
दूसरी कैटेगरी में विधायकों के लिए गुस्से को रखा गया।
सर्वे के दौरान जनता ने सरकार से जुड़ी जिन नीतियों और घटनाओं पर असंतोष जताया,
वो हैं- UGC के नए नियम- लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा यूजीसी के नए नियमों की रही।
राम मंदिर चढ़ावा मामला: अवध-पूर्वांचल में सबसे ज्यादा चर्चा, लोगों में नाराजगी
प्रशासनिक सुस्ती: थाना-तहसील स्तर पर सुनवाई न होने से जनता में रोष
योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक न पहुँचने से भी लोगों में हताशा
भर्ती परीक्षाएं: नीट जैसे पेपर लीक रोकना सरकार की मुख्य जिम्मेदारी मानी गई।
एथेनॉल नीति: ई-20 (E-20) पेट्रोल से माइलेज घटने व इंजन खराब होने पर सवाल उठे।



