BY: Yoganand Shrivastva
BRICS Dinner Vegetarian Menu दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट के गाला डिनर में पूरी तरह शाकाहारी भोजन परोसे जाने को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि 80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं। उन्होंने भारतीय मांसाहारी व्यंजनों की तारीफ करते हुए खाने की मेज पर रखे छोले-भटूरे की तस्वीर भी साझा की।

कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी डिनर के मेन्यू को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी भारतीयों पर अपनी खान-पान की पसंद थोपने के बाद अब दुनिया भर से आए मेहमानों पर भी अपनी पसंद थोप रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार भारत की खान-पान की विविधता को दुनिया के सामने रखने से बच रही है।
आइसलैंड के पूर्व राष्ट्रपति ने याद किया एपीजे अब्दुल कलाम का दौरा
BRICS Dinner Vegetarian Menu इसी विवाद के बीच आइसलैंड के पूर्व राष्ट्रपति ओलाफुर रेगनर ग्रिम्सोन ने करीब 20 साल पुराना किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम आइसलैंड की राजकीय यात्रा पर गए थे, तब उनके लिए पूरी तरह शाकाहारी राजकीय भोज का आयोजन किया गया था।
BRICS Dinner Vegetarian Menu ग्रिम्सोन ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा कि उन्होंने भारत के राष्ट्रपति के लिए पूरी तरह शाकाहारी मेन्यू पेश किया था, जबकि आइसलैंड में शाकाहारी होना आसान नहीं है। ग्रिम्सोन वर्ष 1996 से 2016 तक आइसलैंड के राष्ट्रपति रहे थे। उनकी यह टिप्पणी ब्रिक्स डिनर के शाकाहारी मेन्यू पर हो रही चर्चाओं के बीच सामने आई है।
खांडवी से पनीर लबाबदार तक, डिनर में परोसे गए ये व्यंजन
BRICS Dinner Vegetarian Menu प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में ब्रिक्स नेताओं के लिए गाला डिनर का आयोजन किया था। डिनर के मेन्यू में भारतीय व्यंजनों की झलक देखने को मिली। इसमें खांडवी, पनीर लबाबदार, गुच्ची मार्मिक, बाजरा पुलाव, मशरूम गलौटी और जलेबी जैसे शाकाहारी व्यंजन शामिल थे।
कांग्रेस की आलोचना पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है। रिजिजू के मुताबिक, मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का आनंद लिया, जिनमें स्वाद और पोषण के साथ अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं की झलक थी।
वहीं पवन खेड़ा ने भारत की विविध खान-पान संस्कृति का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब देश में कई तरह के बेहतरीन व्यंजन मौजूद हैं, तो सरकार ने ब्रिक्स डिनर में सिर्फ शाकाहारी भोजन परोसने का फैसला क्यों किया। इस पूरे विवाद के बीच एपीजे अब्दुल कलाम से जुड़ा आइसलैंड के पूर्व राष्ट्रपति का पुराना किस्सा चर्चा में आ गया है।


