Sculptor Financial Crisis के बीच त्योहारों की रौनक बढ़ाने वाली गणेश प्रतिमाएं बनाने वाले स्थानीय कलाकारों की चिंता बढ़ गई है। सरगुजा संभाग के बलरामपुर निवासी मूर्तिकार सचिंद्रनाथ मंडल करीब पांच दशक से मूर्ति निर्माण का काम कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1977 में अंबिकापुर के घड़ी चौक स्थित दुर्गाबाड़ी से मूर्तियां बनाना शुरू किया था। उस समय उन्होंने महज 3 रुपये में मां काली और 70 रुपये में मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार की थी।
Sculptor Financial Crisis: 210 गणेश प्रतिमाएं बनाईं, अब तक सिर्फ 70 बिकीं
Sculptor Financial Crisis का असर इस बार सचिंद्रनाथ मंडल के काम पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने गणेश उत्सव को देखते हुए छोटी-बड़ी करीब 210 गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं, लेकिन अब तक इनमें से केवल 70 प्रतिमाएं ही बिक सकी हैं। बड़ी संख्या में तैयार प्रतिमाएं अब भी बिक्री का इंतजार कर रही हैं।
Sculptor Financial Crisis के चलते मूर्तिकार के सामने लागत और मेहनत की भरपाई को लेकर चिंता खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि मूर्ति बनाने में समय, मेहनत और सामग्री तीनों लगते हैं, लेकिन बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं होने पर पूरे परिवार की मेहनत प्रभावित होती है।
Sculptor Financial Crisis: बाहर से आने वाली मूर्तियों से बढ़ी प्रतिस्पर्धा
Sculptor Financial Crisis की एक बड़ी वजह मूर्तिकार स्थानीय बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को भी मान रहे हैं। सचिंद्रनाथ मंडल के अनुसार दूसरे प्रदेशों से ट्रकों में छोटी-बड़ी मूर्तियां अंबिकापुर और आसपास के क्षेत्रों में लाई जा रही हैं। इससे स्थानीय स्तर पर मूर्ति तैयार करने वाले कलाकारों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
Sculptor Financial Crisis के बीच स्थानीय मूर्तिकारों का कहना है कि बाहर से आने वाली प्रतिमाओं के कारण उनके बनाए उत्पादों की बिक्री प्रभावित हो रही है। वर्षों से पारंपरिक तरीके से मूर्तियां तैयार करने वाले कलाकारों को उम्मीद है कि स्थानीय स्तर पर उन्हें बाजार और प्रशासन की ओर से सहयोग मिल सकेगा।
Sculptor Financial Crisis: पांच दशक से पूरा परिवार कर रहा मूर्ति निर्माण
Sculptor Financial Crisis के बावजूद सचिंद्रनाथ मंडल का परिवार आज भी मूर्ति निर्माण के काम से जुड़ा हुआ है। करीब 50 वर्षों से यह परिवार त्योहारों के लिए देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार करता आ रहा है। बदलते समय और बढ़ती महंगाई के बावजूद मूर्तिकार की मेहनत और कला के प्रति समर्पण में कमी नहीं आई है।
Sculptor Financial Crisis ने हालांकि इस पारंपरिक व्यवसाय की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मूर्तिकारों के सामने कच्चे माल, श्रम और परिवहन जैसे खर्चों के साथ तैयार प्रतिमाओं की बिक्री सुनिश्चित करना भी चुनौती बनता जा रहा है।
Sculptor Financial Crisis: स्थानीय कलाकारों को सरकार से संरक्षण की उम्मीद
Sculptor Financial Crisis के बीच सचिंद्रनाथ मंडल अब सरकार और प्रशासन से स्थानीय मूर्तिकारों के लिए सहयोग और संरक्षण की उम्मीद कर रहे हैं। उनका मानना है कि स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन मिलने से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है, बल्कि वर्षों पुरानी मूर्ति निर्माण की कला और परंपरा को भी आगे बढ़ाया जा सकेगा।
Sculptor Financial Crisis की तस्वीर त्योहारों के दौरान खास तौर पर सामने आती है। एक तरफ बाजारों में गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी को लेकर उत्साह दिखाई देता है, वहीं दूसरी तरफ इन प्रतिमाओं को तैयार करने वाले कलाकार अपनी मेहनत की उचित कीमत और बिक्री के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब स्थानीय मूर्तिकारों को प्रशासनिक सहयोग और खरीदारों के समर्थन का इंतजार है।
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