भारत ने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान के आतंकवाद को वित्त पोषित करने के आरोपों को लेकर कड़ी पहल शुरू कर दी है। इसके तहत भारत फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) को एक विस्तृत और प्रमाणिक डोसियर सौंपने जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान को फिर से आतंक वित्तपोषण की ग्रे लिस्ट में शामिल करने की सिफारिश की जाएगी। यह कदम पाकिस्तान की प्रतिबद्धताओं के पालन में विफलता और आतंकवाद के प्रति उसकी सहमति को लेकर चिंता के बीच उठाया गया है।
भारत क्यों चाहता है पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट में वापस?
पाकिस्तान को अक्टूबर 2022 में FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर किया गया था, लेकिन भारत का कहना है कि उसने अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं किया है। भारत के अनुसार, पाकिस्तान अब भी आतंकवादी संगठनों को वित्तीय और अन्य मदद प्रदान कर रहा है, खासकर भारत को निशाना बनाते हुए। इस अभियान के तहत भारत:
- ठोस और जांचे-परखे सबूत इकट्ठा कर रहा है
- पाकिस्तान के आतंक संगठनों से जुड़ी वित्तीय कड़ियां उजागर कर रहा है
- अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक से पाकिस्तान को दिया जाने वाला आर्थिक मदद पुनः जांचने की मांग कर रहा है
डोसियर में क्या है: आतंक फंडिंग के सबूत
भारत की तैयारी में शामिल डोसियर में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल हैं:
- पाकिस्तान के राज्य नियंत्रण वाले स्रोतों से आतंकवादी समूहों तक पहुंचने वाले वित्तीय लेन-देन का ब्यौरा
- कई देशों के इंटेलिजेंस इनपुट जो आतंकवादी गतिविधियों के लिए आर्थिक और तार्किक मदद की पुष्टि करते हैं
- यह सबूत यह दर्शाते हैं कि यह एक व्यवस्थित और नियमित सहायता है, न कि असामान्य घटना
पाकिस्तान का बढ़ता सैन्य बजट आर्थिक संकट के बीच
भारत का तर्क है कि पाकिस्तान अपनी राष्ट्रीय बजट का लगभग 18% हिस्सा रक्षा क्षेत्र पर खर्च करता है, जो वैश्विक औसत (10-14%) से कहीं अधिक है। आर्थिक संकट के समय यह भारी सैन्य खर्च पाकिस्तान की शांति की मंशा पर सवाल उठाता है।
मुख्य तथ्य:
- IMF सहायता प्राप्त वर्षों में पाकिस्तान के हथियार आयात में 20% वृद्धि
- ऐसा लगता है कि आर्थिक सुधार के लिए मिले विदेशी सहायता को सैन्य विस्तार में लगाया जा रहा है
सहायता का दुरुपयोग: बढ़ता कर्ज और रक्षा व्यय
भारत की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान का विदेशी कर्ज बढ़ता जा रहा है, जबकि उसका रक्षा बजट भी तेजी से बढ़ रहा है। यह संकेत देता है:
- अंतरराष्ट्रीय सहायता का पारदर्शिता रहित उपयोग
- आर्थिक सहायता का आतंकवाद के लिए उपयोग
भारत FATF से इन मुद्दों पर कड़ी निगरानी की मांग कर रहा है।
वैश्विक कूटनीति में भारत की पहल: ऑपरेशन सिंदूर
डोसियर के साथ-साथ भारत दुनिया भर में कूटनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय है:
- बहरीन में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान को “असफल राज्य” बताया और ग्रे लिस्ट में पुनः शामिल करने का समर्थन मांगा
- न्यूयॉर्क में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पाकिस्तान को “पुनर्लेखनवादी ताकत” कहा और सीमा पार हमले पर सख्त चेतावनी दी
- सोल में पूर्व मंत्री सलमान खुर्शीद ने जम्मू-कश्मीर की शांति और विकास पर बल दिया, जो पाकिस्तान की अस्थिरता की कथाओं को झुठलाता है
- UAE और कांगो के नेताओं के साथ बातचीत में शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख को दोहराया
ये प्रयास पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने का लक्ष्य रखते हैं।
भारत और विश्व के लिए इसका मतलब
भारत की यह पहल आतंक फंडिंग को रोकने, आर्थिक सहायता के सही उपयोग को सुनिश्चित करने और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। FATF और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के वित्तीय व्यवहार पर प्रकाश डालकर भारत स्थायी दबाव बनाना चाहता है जो आतंकवाद को कम करे और क्षेत्र में शांति बढ़ाए।
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निष्कर्ष
पाकिस्तान को फिर से FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल करने के लिए भारत का प्रयास एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और रणनीतिक कदम है। प्रमाणों और वैश्विक समर्थन के जरिए भारत आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और अंतरराष्ट्रीय सहायता के दुरुपयोग को समाप्त करने की कोशिश कर रहा है। यह न केवल भारत की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भी योगदान देता है।





