5 अप्रैल को समता दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो भारत के प्रमुख समाजवादी नेता बाबू जगजीवन राम की जयंती को समर्पित है। यह दिन तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश होता है।
बाबू जगजीवन राम: एक परिचय
‘बाबूजी’ के नाम से मशहूर जगजीवन राम एक स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक न्याय के योद्धा, कुशल संसदीय नेता और दलित समुदाय के मसीहा थे। उन्होंने देश के पहले श्रम मंत्री के रूप में कार्य किया और 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान रक्षा मंत्री की भूमिका निभाई।

समता दिवस का महत्व
इस दिन को राष्ट्रीय समता दिवस के रूप में मनाने का उद्देश्य समाज में फैले भेदभाव, असमानता और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना है। बाबूजी का जीवन हमें न्याय और समानता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।
बाबू जगजीवन राम का प्रारंभिक जीवन
- जन्म: 5 अप्रैल, 1908 को बिहार के चंदवा गाँव (अब भोजपुर जिला) में हुआ।
- शिक्षा: कलकत्ता विश्वविद्यालय से BSc की डिग्री प्राप्त की।
- सामाजिक संघर्ष: स्कूल में ‘अछूत’ माने जाने के कारण अलग पानी पीने के बर्तन का विरोध किया और उसे तोड़ दिया।
राजनीतिक योगदान
- 1934 में अखिल भारतीय रविदास महासभा की स्थापना की।
- 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी।
- आजादी के बाद देश के पहले श्रम मंत्री बने।
- 1977 में भारत के उप-प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त हुए।
मृत्यु और विरासत
6 जुलाई, 1986 को उनका निधन हुआ। दिल्ली में उनकी समाधि स्थल को ‘समता स्थल’ नाम दिया गया है।
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:
- वे 50 वर्षों तक संसद सदस्य रहे, जो एक विश्व रिकॉर्ड है।
- 2008 में उनकी जन्मशताब्दी पूरे देश में मनाई गई।
निष्कर्ष:
बाबू जगजीवन राम का जीवन सामाजिक न्याय और समानता के लिए समर्पित रहा। समता दिवस हमें उनके आदर्शों को अपनाने और भेदभाव मुक्त समाज बनाने की प्रेरणा देता है।
Ye Bhi Pade – 6 या 7 अप्रैल? राम नवमी 2025 की सही तिथि और पूजा का श्रेष्ठ समय