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Accident thrasher : दोनों हाथ गंवाने के बाद भी न हार मानी, 10 साल से बना रहे चाय: संतोष की प्रेरक कहानी

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संवाददाता: रत्नेश डेहरिया

दुर्घटना और जीवन की चुनौती

Accident हर्रई के संतोष कहार की कहानी हौसले और जिंदादिली की मिसाल है। लगभग 20 साल पहले फसल के थ्रेसर में काम करते समय एक भयंकर दुर्घटना में संतोष के दोनों हाथ कट गए। उस समय उन्हें लगा कि अब उनका जीवन खत्म हो गया और वे किसी काम के योग्य नहीं रहे। यह हादसा उनके लिए बेहद कठिन था, लेकिन उन्होंने हार मानने का नाम नहीं लिया।

हौसले और मेहनत की मिसाल

Accident संतोष ने अपनी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के बावजूद जीवन में आगे बढ़ने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने हौसलों और जिंदादिली के बल पर किसी प्रकार की कमजोरी को अपने रास्ते में नहीं आने दिया। वह विभिन्न जगहों पर मजदूरी करते रहे और धीरे-धीरे अपनी जिंदगी को फिर से संवारने लगे।

नए सफर की शुरुआत

Accident लगभग 10 साल से संतोष अपने हाथ न होने के बावजूद चाय बनाने का काम कर रहे हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि जीवन की कठिनाइयाँ और शारीरिक अक्षमता इंसान को रोक नहीं सकती। संतोष कहार ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से साबित कर दिया कि किस्मत केवल हाथों की लकीरों पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के हौसले और लगन पर भी निर्भर करती है।

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