10 हजार की शर्त ने ली जान: बेंगलुरु में युवक ने एक साथ पी डाली पांच बोतल शराब, इलाज के दौरान मौत

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BY: Yoganand Shrivastva

बेंगलुरु (कर्नाटक): कभी-कभी दिखावे और शर्त की होड़ जानलेवा साबित हो जाती है। ऐसा ही एक दुखद मामला सामने आया है बेंगलुरु से, जहां 21 वर्षीय युवक कार्तिक ने अपने दोस्तों से लगी एक शर्त को जीतने के चक्कर में अपनी जान गंवा दी। शर्त थी कि वह बिना पानी मिलाए लगातार पांच बोतल शराब पी जाएगा। इनाम था सिर्फ 10 हजार रुपये।

कार्तिक ने यह चुनौती स्वीकार कर ली और पांच बोतल शराब गटक गया। शर्त तो वह जीत गया, लेकिन शराब का ज़हर उसके शरीर में तेजी से फैलने लगा। कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ गई। दोस्तों ने उसे तुरंत कोलार ज़िले के मुलबागल के एक अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन वहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।

8 दिन पहले ही बना था पिता

इस घटना को और भी ज्यादा पीड़ादायक बना देती है यह सच्चाई कि कार्तिक की शादी को अभी एक साल भी नहीं हुआ था और वह हाल ही में, यानी सिर्फ 8 दिन पहले ही पिता बना था। परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन एक मूर्खतापूर्ण निर्णय ने सब कुछ उजाड़ दिया।

दोस्तों पर मामला दर्ज

पुलिस ने कार्तिक के दोस्तों वेंकट रेड्डी, सुब्रमणि और चार अन्य युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। वेंकट और सुब्रमणि को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि दोस्तों ने उसे उकसाया और शराब उपलब्ध कराई थी, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से उसकी मौत हुई।

WHO की चेतावनी: शराब की हर बूंद है हानिकारक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, शराब पीने का कोई “सुरक्षित स्तर” नहीं होता। WHO की रिपोर्ट साफ तौर पर कहती है कि शराब की पहली बूंद से ही शरीर पर बुरा असर शुरू हो जाता है।
यूरोप में WHO की क्षेत्रीय सलाहकार डॉ. कैरिना फेरेरा-बोर्गेस कहती हैं, “हम यह नहीं कह सकते कि थोड़ी शराब पीना सुरक्षित है। चाहे आप जितनी भी मात्रा में शराब लें, वह शरीर को नुकसान ही पहुंचाती है।”

WHO के आंकड़ों के अनुसार, हर साल दुनिया भर में करीब 26 लाख लोगों की मौत शराब के सेवन से होती है, जो वैश्विक मृत्यु दर का लगभग 4.7% है।

सबक: दिखावे से बड़ी है ज़िंदगी

यह घटना एक चेतावनी है, खासकर युवाओं के लिए, कि शौक, शर्त और दिखावे के चक्कर में कभी भी अपने जीवन को जोखिम में न डालें। कुछ मिनटों की जीत कभी-कभी पूरी उम्र का पछतावा बन जाती है — और कई बार तो पछताने का भी मौका नहीं मिलता।

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