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ऑपरेशन ट्राइडेंट: जब भारतीय नौसेना ने समुद्र की गहराइयों में पाकिस्तान को दी करारी शिकस्त

BY: Yoganand Shrivastva

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश में गुस्से का माहौल है। इस घटना में 26 लोगों की जान गई, जिसके बाद भारतीय सेना को पूरी छूट दी गई है। इन हालातों के बीच पाकिस्तान के नेता बार-बार परमाणु हमले की धमकी दे रहे हैं, लेकिन शायद वे 1971 की उस ऐतिहासिक रात को भूल गए हैं जब भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट के जरिए उनकी नींव हिला दी थी।

जब समंदर बना रणभूमि

1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध की पृष्ठभूमि में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) का नरसंहार था। पाकिस्तानी सेना द्वारा बंगाली नागरिकों पर किए जा रहे अत्याचारों के खिलाफ भारत ने मोर्चा खोला। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने पूर्वी पाकिस्तान को आज़ाद कराने का निर्णय लिया। जहां ज़मीनी लड़ाई पूर्वी मोर्चे पर हो रही थी, वहीं समुद्र में भारतीय नौसेना ने एक साहसिक अभियान की शुरुआत की—जिसे नाम दिया गया ऑपरेशन ट्राइडेंट।

‘अडिग’ समझी जाने वाली गाजी को किया गया जलसमाधि

पाकिस्तानी पनडुब्बी PNS गाजी को ‘अपराजेय’ माना जाता था। इसे भारतीय तट पर हमला करने के इरादे से भेजा गया था। लेकिन भारतीय नौसेना की सूझबूझ और रणनीति ने गाजी की इस गलतफहमी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। विशाखापट्टनम के पास भारतीय नौसेना ने गाजी को निशाना बनाया और उसे समंदर में डुबो दिया। यह युद्ध के शुरुआती दिनों में भारत की एक बड़ी उपलब्धि थी।

कराची पर आंधी बनकर टूटी भारतीय नौसेना

4 दिसंबर 1971 की रात भारतीय नौसेना के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। इसी रात नौसेना ने कराची बंदरगाह पर अचानक हमला बोला। यह बंदरगाह पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों का केंद्र था। भारतीय मिसाइल बोट्स ने वहां तैनात पाकिस्तानी युद्धपोत, तेल के टैंकर और अन्य जहाजों को आग के हवाले कर दिया। इस हमले में पाकिस्तान को भारी क्षति हुई।

ऑपरेशन ट्राइडेंट की सफलता

इस मिशन का उद्देश्य न केवल कराची बंदरगाह को नुकसान पहुंचाना था, बल्कि पाकिस्तान की सैन्य शक्ति और मनोबल को कमजोर करना भी था। यह लक्ष्य पूरी तरह सफल रहा। कराची बंदरगाह कई दिनों तक जला करता रहा और पाकिस्तान की नौसेना की रीढ़ टूट गई।

पाकिस्तान का विभाजन और बांग्लादेश का जन्म

इस युद्ध के अंत में 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया—जो कि विश्व युद्धों के बाद किसी भी युद्ध में सबसे बड़ा आत्मसमर्पण था। इसके बाद एक नया देश बांग्लादेश अस्तित्व में आया। पाकिस्तान का विभाजन हो गया और इतिहास ने यह दिखा दिया कि भारतीय सेना—ज़मीन, आकाश और जल तीनों ही क्षेत्रों में दुश्मन को मात देने में सक्षम है।

आज भी है प्रासंगिक

आज जब पाकिस्तान बार-बार युद्ध की धमकियाँ देता है, तो उसे अपने अतीत की इस करारी हार को याद रखना चाहिए। ऑपरेशन ट्राइडेंट सिर्फ एक सैन्य मिशन नहीं था, बल्कि भारत के समुद्री पराक्रम का प्रतीक था—जो आने वाले समय में भी प्रेरणा बना रहेगा।

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