by: vijay yadav
Navratri Ambe Tu Hai : नवरात्रि आते ही शहरों की गलियां माता के जयकारों से गूंजने लगती हैं। कहीं गरबा और डांडिया की धूम होती है तो कहीं माता के जागरण और भजन-कीर्तन। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा देवी गीत है, जिसकी धुन सुनते ही माहौल भक्तिमय हो जाता है—“अम्बे तू है जगदम्बे काली…”
दिलचस्प बात यह है कि यह पारंपरिक अंदाज में गाया जाने वाला देवी गीत एक हिंदी फिल्म से भी जुड़ा हुआ है। यह गीत वर्ष 1955 में आई फिल्म ‘नवरात्रि’ का हिस्सा था। उपलब्ध गीत-स्रोतों के मुताबिक इसे मोहम्मद रफ़ी और आशा भोसले ने आवाज दी थी, जबकि संगीतकार चित्रगुप्त और गीतकार भारत व्यास थे।
Navratri Ambe Tu Hai : फिल्म से निकलकर पंडालों तक पहुंचा गीत
1950 के दशक में धार्मिक और पौराणिक विषयों पर फिल्में बनती थीं और उनके गीत लोगों तक बहुत तेजी से पहुंचते थे। ‘नवरात्रि’ भी इसी दौर की फिल्म थी। फिल्म से जुड़ा यह देवी गीत बाद में सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रहा।
समय के साथ माता के जागरण, दुर्गा पूजा और नवरात्रि के आयोजनों में इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई। आज भी इसके अलग-अलग गायकों और संगीतबद्ध संस्करणों को सुना जाता है। देवी आरती के संकलनों में भी इसे नवरात्रि और माता की पूजा से जुड़े प्रमुख गीतों में शामिल किया जाता है।
Navratri Ambe Tu Hai : क्या है इस गीत की खासियत?
इस गीत की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरल भाषा और सामूहिक गायन की शैली है। इसमें मां दुर्गा को शक्ति के अलग-अलग रूपों में याद किया गया है। यही वजह है कि इसे अकेले गाने के बजाय पूरा पंडाल एक साथ गा सकता है।

Navratri Ambe Tu Hai : इसका प्रसिद्ध मुखड़ा है:
“अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली…”
यह छोटी-सी पंक्ति ही गीत की पूरी भावना सामने रख देती है—मां को शक्ति, रक्षा और बुराई के विनाश के रूप में याद करना।
Navratri Ambe Tu Hai : एक गीत, कई पीढ़ियों की याद
आज नवरात्रि के पंडालों में डीजे, आधुनिक भक्ति संगीत और नए माता के भजनों की भरमार है। इसके बावजूद पुराने देवी गीत अपनी जगह बनाए हुए हैं। ‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ भी ऐसा ही गीत है, जिसे नई पीढ़ी ने अलग-अलग गायकों की आवाज में सुना है।
रिकॉर्डेड संस्करणों में अनुराधा पौडवाल की आवाज से जुड़ा संस्करण भी काफी लोकप्रिय रहा है।
यानी एक तरफ 1955 की फिल्म, दूसरी तरफ आज के नवरात्रि पंडाल—करीब सात दशक का सफर तय करने के बाद भी गीत की लोकप्रियता बनी हुई है।
Navratri Ambe Tu Hai : बोलों में छिपा है मां-बेटे का रिश्ता
गीत केवल देवी की शक्ति का गुणगान नहीं करता, बल्कि मां और भक्त के रिश्ते को भी सामने रखता है। यही भाव इसे महज फिल्मी गीत से आगे ले जाता है।
गीत के एक हिस्से में मां और बेटे के रिश्ते को निर्मल बताया गया है और यह भाव रखा गया है कि मां अपने बच्चों की विपत्ति में रक्षा करती है। यही सरल भाव भक्तों को गीत से जोड़ता है।
Navratri Ambe Tu Hai : क्यों याद आता है नवरात्रि में?
नवरात्रि में पंडालों में भक्ति का माहौल सामूहिक होता है। हजारों लोग एक साथ माता के जयकारे लगाते हैं। ऐसे में जिस गीत के बोल सरल हों, धुन आसानी से याद रह जाए और जिसे पूरा समूह साथ गा सके, वह जल्दी लोकप्रिय हो जाता है।
‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ ने इसी सामूहिक भक्ति की भावना को लंबे समय तक बनाए रखा है।
आज जब नवरात्रि में किसी पंडाल से इसकी धुन सुनाई देती है तो यह सिर्फ एक भजन नहीं लगता—यह कई पीढ़ियों की साझा धार्मिक और सांस्कृतिक स्मृति की आवाज बन जाता है।
नोट: पूरे गीत के बोल कॉपीराइट के कारण यहां प्रकाशित नहीं किए जा सकते; ऊपर केवल संक्षिप्त अंश दिया गया है।
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