मुंह में राम, बगल में छुरी, ट्रंप की दोगली नीति: सुबह पीएम मोदी को दोस्त बताया, शाम को EU को भारत पर 100% टैरिफ लगाने को कहा
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by: vijay nandan
दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप (Trump Tariffs) ने बुधवार को सुबह पीएम नरेंद्र मोदी को अपना “दोस्त” बताया, लेकिन शाम होते-होते बिल्कुल अलग रुख अपना लिया। उन्होंने यूरोपीय संघ (EU Trade Restrictions) से भारत पर 100% टैरिफ लगाने की अपील की। यह मांग उन्होंने उस समय रखी, जब वे वॉशिंगटन में चल रही अमेरिका-यूरोप बैठक में फोन के जरिए शामिल हुए थे।
ट्रंप ने यह मांग वॉशिंगटन में अमेरिका-यूरोप की बैठक में फोन पर हिस्सा लेते हुए की।
बैठक में रूस पर आर्थिक लागत बढ़ाने के नए उपायों पर चर्चा हो रही थी।
अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, अगर ईयू भारत और चीन पर टैरिफ लगाता है तो वॉशिंगटन भी उसी तरह की कार्रवाई करेगा।
भारत-अमेरिका रिश्तों में बढ़ती खटास
हाल ही में ट्रंप और पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर भारत-अमेरिका रिश्तों को सकारात्मक दिशा देने की बात कही थी। लेकिन हकीकत यह है कि:
अमेरिका पहले ही भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% तक बढ़ा चुका है।
रूस से तेल खरीद पर 25% अतिरिक्त शुल्क भी जोड़ा गया है।
भारत ने इसे “अनुचित और अन्यायपूर्ण” बताया है।
व्हाइट हाउस के एडवाइजर के तीखे बोल
व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने भारत को लेकर कहा:
“भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के बावजूद अब रूस के लिए तेल रिफाइनिंग हब और मनी लॉन्ड्रोमैट बन चुका है।”
भारत का स्पष्ट पक्ष: राष्ट्रहित में तेल खरीद
भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि:
तेल खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार परिस्थितियों पर आधारित है।
रूस से तेल इसलिए खरीदा जा रहा है क्योंकि वह डिस्काउंट पर उपलब्ध है।
आंकड़े बताते हैं:
2019-20 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी सिर्फ 1.7% थी।
2024-25 में यह बढ़कर 35.1% हो गई।
रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और ट्रंप की रणनीति
ट्रंप की यह सख्ती उस समय आई है, जब उन्होंने पिछले महीने अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने युद्ध खत्म करने के रास्तों पर चर्चा की थी।
निश्तों में नई चुनौतियां
भारत-अमेरिका संबंधों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ता दिख रहा है। ट्रंप का यह नया दांव भारत के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, जबकि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित पर समझौता करने को तैयार नहीं है।