उमेश डहरिया, कोरबा
कोरबा जिले में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सुर्खियों में है। करोड़ों की सरकारी जमीन को बचाने के नाम पर वसूली और अधूरी कार्रवाई से प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जा
सूत्रों के मुताबिक, शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे कर उसे बेचने का खेल लंबे समय से चल रहा है। शिकायतों के बाद निगम प्रशासन ने 19 कब्जाधारियों को नोटिस जारी किया था और मुनादी भी कराई गई थी।
नौ घरों पर हुई कार्रवाई
नोटिस के बाद प्रशासन ने केवल 9 घरों पर कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया। इन मकानों को शासकीय भूमि से मुक्त कराया गया।
बाकी 10 पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
हालांकि, बाकी 10 अतिक्रमणकारियों पर कोई असर नहीं दिखा। प्रशासन ने अब तक इन पर किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की है। यही वजह है कि यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
पैसों की वसूली के आरोप
सूत्रों का दावा है कि अवैध कब्जों को बचाने के नाम पर 9 घरों से पचास-पचास हजार रुपये की वसूली भी की गई है। यह आरोप प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सवालों के घेरे में प्रशासन
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधूरी कार्रवाई प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाती है। यदि शासकीय भूमि को कब्जामुक्त कराने का संकल्प लिया गया था, तो बाकी 10 अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?





