Ekatam Parv : मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में ‘एकात्म धाम’ में आयोजित होने वाला एकात्म पर्व 17 से 21 अप्रैल तक आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र चेतना का एक अद्वितीय संगम है।यह महोत्सव आदि गुरु शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत दर्शन को वैश्विक पटल पर स्थापित करने और राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने के संदेश के साथ मनाया जा रहा है।मध्यप्रदेश के खंडवा जिले स्थित पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में आज आध्यात्म, संस्कृति और राष्ट्र चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
Ekatam Parv : ओंकारेश्वर में ‘एकात्म पर्व’ विशेष, आध्यात्म, संस्कृति, राष्ट्र चेतना का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में एकात्म धाम परिसर में पांच दिवसीय ‘एकात्म पर्व’ का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ हुई, जहां मुख्यमंत्री ने प्रदेश की समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि एकात्म धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एकात्म पर्व’ के माध्यम से समाज में समरसता, एकजुटता और राष्ट्रभाव को सशक्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
Ekatam Parv : एकात्म पर्व ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे भारतीय संस्कृति और परंपराओं को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व में संत-महात्माओं के प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या और विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। देशभर से श्रद्धालु और साधु-संत इस आयोजन में भाग ले रहे हैं, जिससे ओंकारेश्वर एक बार फिर आस्था और आध्यात्म का केंद्र बन गया है। ‘एकात्म पर्व’ का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी सशक्त संदेश दे रहा है।
पर्व के दौरान आध्यात्मिक प्रवचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, और विचार गोष्ठियों के माध्यम से भारतीय जीवन मूल्यों और परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। देशभर से आए संत, विद्वान और कलाकारों ने इस आयोजन में भाग लिया है।
Ekatam Parv : एकात्म पर्व के मुख्य संदेश और विशेषताएं
आध्यात्मिक चेतना और अद्वैत दर्शन
• यह पर्व शंकराचार्य की ज्ञान भूमि ओंकारेश्वर में उनके प्रकटोत्सव (वैशाख शुक्ल पंचमी) के अवसर पर आयोजित होता है।
• यहाँ 108 फीट ऊँची ‘एकात्मता की मूर्ति’ के सान्निध्य में अद्वैत वेदांत, वैदिक अनुष्ठान, और ध्यान सत्रों के माध्यम से ‘सब में एक’ का भाव प्रसारित किया जाता है।
सांस्कृतिक एकता का महाकुंभ
• पांच दिवसीय कार्यक्रम में देश भर के प्रतिष्ठित कलाकारों द्वारा शास्त्रीय गायन, ओडिसी नृत्य, भरतनाट्यम,
• कर्नाटक संगीत और निर्गुण वाणी के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विविधता में एकता को दर्शाया जाता है।
राष्ट्र चेतना और शंकरदूत
• यह आयोजन ‘राष्ट्र चेतना’ का विशेष संदेश देता है।
• 700 से अधिक युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में दीक्षा लेकर शंकराचार्य के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेते हैं।
आधुनिक युग में प्रासंगिकता
• एकात्म पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ‘अद्वैत लोक’ संग्रहालय के माध्यम से यह संदेश देता है
• कि आज के दौर में शांति, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक भाईचारे के लिए अद्वैत दर्शन अत्यंत प्रासंगिक है।

