मरवाही: प्रकृति प्रेम और खुशहाली का पर्व ‘कजलिया’ में सिवनी में मची धूम

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Marwahi: Festival of love for nature and happiness 'Kajaliya' created a buzz in Seoni

मरवाही। रक्षाबंधन के दूसरे दिन प्रकृति प्रेम, खुशहाली और परंपरा का संगम लेकर आने वाला कजलिया पर्व आदिवासी अंचल मरवाही के सिवनी में धूमधाम से मनाया गया। गांव की महिलाएं परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ उपवास रखकर पूजा-अर्चना करती नजर आईं। दिनभर उत्साह और भक्ति का माहौल रहा, और शाम होते ही ग्रामीणों ने पूरे विधि-विधान से कजलिया का विसर्जन किया।

श्रावण मास से जुड़ा पारंपरिक पर्व

कजलिया पर्व श्रावण मास की अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन बांस की टोकरी में मिट्टी भरकर गेहूं और जौ के दाने बोए जाते हैं, जिन्हें कजलिया कहा जाता है। एक सप्ताह तक इन पौधों की देखभाल की जाती है, और पर्व के दिन इन्हें नदी, तालाब या कुएं में विसर्जित किया जाता है।

महिलाओं ने रखा उपवास, की मंगलकामनाएं

सिवनी में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर कजलिया पूजन किया और गांव की खुशहाली, अच्छी फसल, और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा के बाद गीत-संगीत और पारंपरिक नृत्यों से माहौल रंगीन हो गया।

परंपरा का संरक्षण

आदिवासी अंचल मरवाही में कजलिया का पर्व पीढ़ियों से मनाया जा रहा है। ग्रामीण इसे न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक मानते हैं, बल्कि इसे प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव और कृषि संस्कृति का उत्सव भी मानते हैं।

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