SC का राहुल गांधी से सवाल: “कैसे साबित कर सकते हैं कि चीन ने ज़मीन कब्जाई?”, सेना पर बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट की फटकार

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BY: Yoganand Shrivastva

नई दिल्ली, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान को लेकर, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि चीन ने भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा किया है, अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने राहुल गांधी से पूछा—”आपको कैसे जानकारी मिली कि चीन ने भारत की 2000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा कर लिया है? क्या आपके पास इसके समर्थन में कोई प्रमाणिक स्रोत है?”

कोर्ट की सख्त टिप्पणी:

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा:

“जब सीमा पर तनाव और संघर्ष की स्थिति हो, तो ऐसे वक्त में इस तरह के बयानों से किसका फायदा होता है? अगर आप सच्चे भारतीय हैं तो इस तरह के आरोप सोशल मीडिया पर लगाने की बजाय संसद में उठाने चाहिए।”

साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि विपक्ष के नेता होते हुए क्या राहुल गांधी को ऐसे संवेदनशील मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उठाना चाहिए, जबकि इसके लिए संसद जैसा मंच मौजूद है।

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में राहत और नोटिस

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को एक राहत देते हुए उनके खिलाफ लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।


मामला क्या है?

यह पूरा मामला 16 दिसंबर 2022 से जुड़ा है, जब भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने कहा था:

“लोग मुझसे भारत जोड़ो यात्रा के बारे में पूछते हैं, लेकिन चीन ने हमारी 2000 वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर कब्जा कर लिया है, हमारे 20 जवान शहीद हो चुके हैं, और अरुणाचल में हमारे सैनिकों को पीटा जा रहा है।”

उनके इस बयान के बाद बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने इसे सेना की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए मानहानि का मामला लखनऊ की अदालत में दर्ज करवाया था।

राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में इस शिकायत और समन को चुनौती दी थी, लेकिन 29 मई 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए मुकदमे की सुनवाई को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था।


बीजेपी का हमला: “विश्वसनीयता पर सवाल”

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद भाजपा ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा:

“यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने ऐसी बयानबाजी की है जो भारत विरोधी लगती है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी उनकी राजनीतिक परिपक्वता और विश्वसनीयता दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।”


इससे पहले भी दे चुके हैं चीन को लेकर बयान

राहुल गांधी चीन से जुड़ी टिप्पणी कई बार कर चुके हैं। 3 अप्रैल 2025 को लोकसभा में उन्होंने कहा था:

“चीन ने हमारी लगभग 4000 वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर कब्ज़ा कर रखा है। इसके बावजूद हमारे अधिकारी चीनी राजदूत के साथ केक काटते दिखते हैं।”

उन्होंने कहा कि सामान्य कूटनीतिक संबंध रखने से परहेज़ नहीं है, लेकिन पहले हमारी जमीन वापस मिलनी चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री द्वारा चीनी राजदूत को पत्र भेजा गया, लेकिन देश की जनता को इसकी जानकारी चीनी राजदूत से मिल रही है, सरकार से नहीं।


गलवान की पृष्ठभूमि

बात 2020 की है जब चीन ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास सैनिकों को बड़ी संख्या में तैनात कर दिया था। यह स्थिति सैन्य टकराव तक जा पहुंची। 15 जून 2020 को गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हुए। इसके जवाब में भारतीय सेना ने भी 40 से अधिक चीनी सैनिकों को मार गिराया था।


सुप्रीम कोर्ट के सवालों और टिप्पणी ने राजनीतिक बयानबाजी के संवेदनशील स्वरूप को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। क्या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक मंच पर इस प्रकार उठाना उचित है, यह प्रश्न अब न्यायपालिका के ज़रिए पूरे देश के सामने है।

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