करंट दे दो, दवा से नहीं मरा’ – देवर-भाभी के अफेयर ने ली पति की जान, चैट से खुली पूरी प्लानिंग

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करंट दे दो, दवा से नहीं मरा

दिल्ली के द्वारका इलाके से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों की मर्यादा और विश्वास को झकझोर कर रख दिया। एक महिला ने अपने देवर के साथ मिलकर अपने ही पति की हत्या कर दी। इस जघन्य अपराध की परतें तब खुलीं जब पुलिस के हाथ इंस्टाग्राम चैट्स लगे, जिनमें हत्या की पूरी साज़िश दर्ज थी।

यह मामला न केवल हत्या की वीभत्सता दिखाता है, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों की अहमियत भी उजागर करता है।


हत्या की कहानी: 13 जुलाई की रात

  • स्थान: दक्षिण-पश्चिम द्वारका, दिल्ली
  • मृतक: करण देव (35 वर्ष)
  • आरोपी: पत्नी सुष्मिता देवी और देवर राहुल देव

13 जुलाई को करण को संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने की सूचना दी गई थी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शुरुआत में यह हादसा लगा, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला हत्या की तरफ मुड़ गया।


पोस्टमॉर्टम से मच गया बवाल

करण की पत्नी सुष्मिता, देवर राहुल और उनके पिता ने पोस्टमॉर्टम का विरोध किया। यह रवैया करण के परिवार को खटक गया। परिवार को शक हुआ कि कुछ तो छुपाया जा रहा है। उन्होंने पुलिस से विस्तृत जांच की मांग की।


इंस्टाग्राम चैट्स ने खोल दिया मर्डर प्लान

करण के छोटे भाई कुनाल को सुष्मिता के फोन में कुछ चौंकाने वाले चैट्स मिले। इनमें सुष्मिता और राहुल के बीच बातचीत चल रही थी, जिसमें वे हत्या की योजना बना रहे थे।

साजिश भरे कुछ चैट्स:

  • सुष्मिता: “देखो दवा खाकर मरने में कितना टाइम लगता है। तीन घंटे हो गए, न उल्टी, न पॉटी, कुछ नहीं। मरा भी नहीं है।”
  • राहुल: “अगर कुछ और समझ नहीं आ रहा तो करंट दे दो।”
  • सुष्मिता: “कैसे बांधूं उसे करंट देने के लिए?”
  • राहुल: “टेप से बांधो।”
  • सुष्मिता: “सांस बहुत धीरे चल रही है।”
  • राहुल: “जितनी दवा है, सब दे दो।”

इस बातचीत से साफ हो गया कि करण की हत्या एक सोची-समझी साजिश थी।


पुलिस की कार्रवाई: आरोपियों की गिरफ्तारी

जब ये चैट्स पुलिस के हाथ लगे, तो सुष्मिता और राहुल को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों से पूछताछ जारी है और अन्य डिजिटल सबूत भी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस अपराध में और लोग शामिल थे या नहीं।

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यह मामला क्यों है अहम?

  • डिजिटल चैट्स का बढ़ता महत्व: इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया चैट्स अब हत्या जैसे मामलों को सुलझाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
  • रिश्तों में छल और अपराध: यह केस दिखाता है कि कैसे पारिवारिक संबंधों की आड़ में खतरनाक साजिशें रची जा सकती हैं।
  • पुलिस की सतर्कता: पोस्टमॉर्टम रुकवाने की कोशिश और परिवार की सजगता ने हत्या की सच्चाई उजागर करने में मदद की।

📌 निष्कर्ष: सतर्क रहें, जागरूक बनें

यह घटना सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। रिश्तों की सतह के नीचे क्या चल रहा है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन सजगता और डिजिटल साक्ष्य की ताकत से सच को सामने लाया जा सकता है।

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