उज्जैन: मंदिर विवाद में पुजारी परिवार का बहिष्कार, बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोज़मर्रा के कामों पर भी लगी रोक

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BY: Yoganand Shrivastva

उज्जैन के झलारिया पीर गांव में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक सामाजिक पंचायत में मंदिर के पुजारी और उनके परिवार का सामूहिक बहिष्कार कर दिया गया। इस बहिष्कार के तहत उनके बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया और परिवार पर पूजा-पाठ, बाल कटवाने और मजदूरी जैसे कार्यों पर भी पाबंदी लगा दी गई। इतना ही नहीं, इस फरमान का उल्लंघन करने वालों पर ₹51,000 का जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी गई।

पंचायत में लिया गया एकतरफा फैसला

गांव के नागराज मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हुए थे। इस बैठक में दूसरी ग्राम पंचायत के सचिव गोकुल सिंह देवड़ा ने माइक पर पंचायत का निर्णय पढ़कर सुनाया, जिसका वीडियो भी सामने आया है। अधिकतर ग्रामीणों ने इस फैसले पर हाथ उठाकर समर्थन जताया, हालांकि एक व्यक्ति ने बच्चों को स्कूल से निकालने का विरोध किया।

बच्चों की शिक्षा पर लगा ब्रेक

पुजारी पूनमचंद चौधरी के बेटे मुकेश ने बताया कि पंचायत के निर्णय के ठीक अगले दिन उनके तीनों बच्चों — 13 वर्षीय संध्या (कक्षा 8वीं), 10 वर्षीय सतीश (कक्षा 5वीं) और 6 वर्षीय विराट (कक्षा 3वीं) — को स्कूल से निकाल दिया गया। स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट कहा कि पंचायत की मुनादी के बाद वे इन बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ हैं।

मंदिर की जमीन को लेकर विवाद

करीब 4,000 की आबादी वाले इस गांव में वर्षों से पूनमचंद चौधरी का परिवार देव धर्मराज मंदिर की देखरेख करता आया है। मंदिर से लगी लगभग 4 बीघा जमीन पर वे खेती करते हैं। पुजारी परिवार का आरोप है कि कुछ ग्रामीण इस जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं और मंदिर का स्थानांतरण करना चाहते हैं। इसी मुद्दे पर विवाद बढ़ा और मामला कोर्ट तक पहुंच गया।

पंचायत ने क्या कहा?

सचिव गोकुल सिंह देवड़ा का कहना है कि मंदिर सार्वजनिक है और इसके जीर्णोद्धार के लिए गांववासियों से ₹6 लाख जुटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुजारी परिवार से बातचीत की कई कोशिशें की गईं, लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया। 14 जुलाई को आयोजित पंचायत में पूनमचंद को बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे।

कलेक्टर से की गई शिकायत

घटना के बाद पुजारी ने उज्जैन कलेक्टर को शिकायत देकर बताया कि उन्हें और उनके परिवार को सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया गया है। न केवल बच्चों की पढ़ाई रोकी गई, बल्कि किसी कार्यक्रम में बुलाया नहीं जा रहा और मजदूर भी उनके खेतों में काम करने से इनकार कर रहे हैं। कलेक्टर ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं।

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