भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे भरोसेमंद माध्यम बन चुका यूपीआई (UPI) अब हर किसी की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। हर दिन लाखों-करोड़ों रुपये के लेनदेन इसी माध्यम से हो रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह खबर तेज़ी से वायरल हुई कि सरकार 3000 रुपये से अधिक की यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज (MDR – Merchant Discount Rate) लगाने जा रही है।
इस खबर से यूजर्स के बीच भ्रम की स्थिति बन गई। लेकिन अब इस पर सरकार ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है।
वित्त मंत्रालय ने क्या कहा?
वित्त मंत्रालय ने साफ-साफ कहा है कि:
- यूपीआई लेनदेन पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लगाया जा रहा है।
- MDR लागू करने की कोई योजना नहीं है।
- इस तरह की खबरें बिल्कुल झूठी, भ्रामक और आधारहीन हैं।
- इन अफवाहों से आम नागरिकों में अनावश्यक डर और संदेह पैदा होता है।
सरकार ने जोर देते हुए कहा कि वह डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए UPI को पूरी तरह निःशुल्क और सुलभ बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
यूपीआई से कितने का होता है लेनदेन?
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़े बताते हैं कि:
- सिर्फ 10 जून 2025 को कुल 634.29 मिलियन UPI ट्रांजैक्शन हुए।
- इन ट्रांजैक्शनों के माध्यम से कुल ₹91,838.53 करोड़ का लेनदेन किया गया।
- जून महीने के पहले 10 दिनों में कुल 6346.42 मिलियन ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए।
- इस दौरान कुल ₹8,98,111.14 करोड़ का डिजिटल भुगतान हुआ।
इन आंकड़ों से साफ है कि UPI अब भारत में डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुका है और इससे जुड़ी कोई भी अफवाह लाखों लोगों को प्रभावित कर सकती है।
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क्या आपको चिंता करने की ज़रूरत है?
बिल्कुल नहीं।
भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि UPI पर किसी प्रकार का चार्ज नहीं लगेगा। आप पहले की तरह बिना किसी शुल्क के UPI का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं।





