पाकिस्तान: आतंकवाद का गढ़ बनाने वाले 4 चेहरे!

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पाकिस्तान आज दुनिया के सामने आतंकवाद का पर्याय बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस देश को आतंक का ब्रांड एम्बेसडर बनाने में किन लोगों ने अहम भूमिका निभाई? आइए, उन चेहरों को एक्सपोज़ करते हैं जिन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद के नक्शे पर स्थापित किया।

1. जनरल जिया-उल-हक: आतंकवाद की नींव रखने वाला तानाशाह

1977 में सत्ता हथियाने वाले जनरल जिया ने पाकिस्तान को “इस्लामिक राष्ट्र” बनाने का सपना दिखाया। उन्होंने मदरसों और जिहादी गुटों को फंडिंग देना शुरू किया, ताकि अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर लड़ा जा सके। इसी दौरान लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों को पनपने का मौका मिला। जिया की नीतियों ने पाकिस्तान को आतंकवाद की फैक्ट्री बना दिया।

2. हफीज सईद: 26/11 का मास्टरमाइंड

जिया के बाद जमात-उद-दावा (JuD) के संस्थापक हफीज सईद ने आतंकवाद को पाकिस्तान का “सॉफ्ट पावर” बनाया। उन्हें मुंबई हमले (26/11) का मुख्य आरोपी माना जाता है, लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें कभी सजा नहीं दी। बल्कि, वहां की अदालतों और सेना ने उन्हें संरक्षण दिया। क्या यह साबित नहीं करता कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है?

3. मौलाना मसूद अजहर: इंडिया का सबसे वांटेड आतंकी

जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर को भारत ने 1999 में रिहा किया था (कंधार हाइजैक के बाद), लेकिन पाकिस्तान ने उसे फिर से आतंक फैलाने की छूट दे दी। उसके संगठन ने पुलवामा अटैक (2019) और संसद हमले जैसे खूनी मिशन अंजाम दिए। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तानी मीडिया उसे “मुजाहिद” बताता है!

4. पाकिस्तानी आर्मी: आतंकवाद का असली चेहरा

सबसे बड़ा सच यह है कि पाकिस्तानी सेना (ISI) इन आतंकी गुटों को ट्रेनिंग, फंडिंग और सुरक्षा देती है। विकीलीक्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना ने तालिबान को पाला, और आज भी वह आतंकियों को “स्ट्रैटेजिक एसेट्स” मानती है। क्या यह दोगलापी नहीं कि एक तरफ पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ होने का दिखावा करता है, लेकिन असल में वह उसे कंट्रोल करता है?

निष्कर्ष: पाकिस्तान—आतंकवाद का स्पॉन्सर

अगर पाकिस्तान सच में आतंकवाद के खिलाफ है, तो उसे हफीज सईद, मसूद अजहर और दूसरे आतंकियों को सजा क्यों नहीं देनी चाहिए? क्यों उसके यहाँ आतंकी संगठन खुलेआम फंड इकट्ठा करते हैं? सच तो यह है कि पाकिस्तान की सेना और सरकार आतंकवाद को अपनी फॉरेन पॉलिसी का हथियार बनाए हुए हैं। जब तक यह सिस्टम नहीं बदलता, पाकिस्तान दुनिया के लिए खतरा बना रहेगा।

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