कैबिनेट मंत्री संजय निषाद का विवादित बयान, विपक्ष ने की कड़ी आलोचना

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उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद का एक विवादित बयान सामने आया है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उनके इस बयान का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह पुलिस को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। विपक्षी दलों ने इस बयान को कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया है और सरकार से इस पर जवाब देने की मांग की है।


क्या कहा संजय निषाद ने?

संवैधानिक अधिकार यात्रा के दौरान सुल्तानपुर जिले के चांदा क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए संजय निषाद ने कहा:

“हम यहां ऐसे ही नहीं पहुंचे, हमने संघर्ष किया है।”

हालांकि, उनके बयान को लेकर कई तरह की व्याख्याएं की जा रही हैं और इसे भड़काऊ बताया जा रहा है।


राजनीतिक विवाद तेज, विपक्ष ने उठाए सवाल

संजय निषाद के इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा।

🔹 विपक्षी नेताओं ने कहा कि एक मंत्री का इस तरह का बयान देना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
🔹 कुछ दलों ने मांग की है कि इस पर मुख्यमंत्री को संज्ञान लेना चाहिए।
🔹 इस बयान से कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


यात्रा के दौरान दिया गया बयान

संजय निषाद इन दिनों अपने समुदाय के हितों को लेकर ‘संवैधानिक अधिकार यात्रा’ निकाल रहे हैं। यह यात्रा 30 नवंबर 2024 को सहारनपुर के मां शाकंभरी देवी शक्तिपीठ से शुरू हुई थी और सोनभद्र तक जाएगी। मंगलवार को सुल्तानपुर में हुई जनसभाओं के दौरान यह बयान दिया गया, जिसके बाद से यह मुद्दा तूल पकड़ चुका है।


समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना

सुल्तानपुर में पत्रकारों से बात करते हुए संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि,

“समाजवादी पार्टी को यह तय करना चाहिए कि वे औरंगजेब को आदर्श मानते हैं या भगवान श्रीकृष्ण को। हम निषादराज को अपना आदर्श मानते हैं और वर्तमान में भगवान राम को आदर्श मानने वाली सरकार सत्ता में है।”

उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि, “सपा के कुछ नेता ही अपनी पार्टी को कमजोर कर रहे हैं और उसे ‘समाप्तवादी पार्टी’ बना रहे हैं।”


क्या होगी सफाई?

इस विवादित बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि संजय निषाद इस पर क्या सफाई देते हैं और सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है। विपक्षी दल इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं और इसे कानून-व्यवस्था की नाकामी से जोड़ रहे हैं।

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