वृंदावन: प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में बसंत पंचमी से आरंभ हुई होली की उमंग रंगभरनी एकादशी के अवसर पर अपने चरम पर पहुंच गई है। मंदिर प्रांगण में इस दिन विशेष रूप से टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों से होली खेली जाती है, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है।
रंगभरनी एकादशी के साथ ही ब्रज में होली महोत्सव की औपचारिक शुरुआत होती है, जो फाल्गुन पूर्णिमा तक जारी रहता है। इस अवधि में वृंदावन, मथुरा, बरसाना और नंदगांव सहित पूरे ब्रज क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की होली का आयोजन किया जाता है, जैसे लड्डू होली, लठमार होली और फूलों की होली।

बांके बिहारी मंदिर में रंगभरनी एकादशी से लेकर होली तक प्रतिदिन विशेष आयोजनों का सिलसिला चलता है, जिसमें भगवान को टेसू के रंग, गुलाल, केसर, इत्र और गुलाब जल से होली खिलाई जाती है। भक्तजन इन आयोजनों में सम्मिलित होकर भक्ति और रंगों के इस अनूठे संगम का आनंद लेते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और रंगीन हो उठता है।
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