विद्या भारती पूर्णकालिक कार्यकर्ता वर्ग का सफल समापन – राष्ट्र निर्माण की दिशा में नया संकल्प

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By: Aakash Sen

भोपाल: विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित अखिल भारतीय पूर्णकालिक कार्यकर्ता वर्ग का समापन आज सरस्वती शिशु मंदिर, शारदा विहार, केरवा बाँध मार्ग पर हुआ। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी श्री सुरेश जी सोनी ने कार्यकर्ताओं को प्रेरणादायी मार्गदर्शन दिया।

समापन समारोह में विद्या भारती के अध्यक्ष श्री दूसी रामकृष्ण राव ने 03 से 08 मार्च तक चले इस अभ्यास वर्ग की संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत की। प्रारंभ में डॉ. राम कुमार भावसार ने अतिथियों का परिचय कराया, जबकि प्रांत अध्यक्ष श्री मोहन लाल गुप्ता एवं सचिव डॉ. शिरोमणि दुबे ने अतिथियों का स्वागत किया। इस कार्यक्रम में देशभर से 700 से अधिक पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जिनमें विद्या भारती के शीर्ष पदाधिकारी भी शामिल रहे।


तकनीकी युग की चुनौतियाँ एवं संगठन की भूमिका

मुख्य वक्ता श्री सुरेश जी सोनी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि विद्या भारती के कार्यकर्ताओं की भूमिका केवल संगठन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज और शिक्षा जगत में उनकी प्रभावी भूमिका भी आवश्यक है।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और उससे उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि तकनीकी प्रगति से मशीनों की क्षमता बढ़ रही है, लेकिन इसके कारण मानव की शारीरिक एवं मानसिक क्षमताएँ प्रभावित हो रही हैं।

डिजिटल युग की बदलती प्रवृत्तियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा—

“आज व्यक्ति यात्रा तो भौतिक साधनों से कर रहा है, लेकिन उसका मन डिजिटल दुनिया में विचरण कर रहा है। यह प्रवृत्ति समाज और पारिवारिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाल रही है।”

उन्होंने कार्यकर्ताओं को सचेत करते हुए कहा—

“तकनीक हमें जोड़ सकती है, लेकिन यह वास्तविक संबंध स्थापित नहीं कर सकती।”

श्री सोनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को उपयोगी बनाते हुए मौलिक बुद्धिमत्ता को बनाए रखने पर जोर दिया और कहा कि तकनीक को साधन बनाना चाहिए, साध्य नहीं।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का प्रेरणादायी संबोधन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में भगवान राम और लक्ष्मण पर महर्षि विश्वामित्र के विश्वास का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि ने राजा दशरथ से विशाल सेना नहीं मांगी, बल्कि गुरुकुल में शिक्षित राम-लक्ष्मण की क्षमताओं पर भरोसा जताया। उन्होंने इस उदाहरण के माध्यम से विद्या भारती के शिक्षण संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इन संस्थानों से अध्ययनरत विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रहे हैं। भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से उन्होंने घोषणा की कि भोपाल में दो प्रमुख द्वारों का निर्माण किया जाएगा—

  • एक राजा भोज के नाम पर
  • दूसरा राजा विक्रमादित्य के नाम पर

उन्होंने कहा कि यह पहल देश के गौरवशाली इतिहास और परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक प्रभावी माध्यम होगी।


राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन

इस कार्यकर्ता वर्ग में शिक्षा, समाज एवं राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। विभिन्न सत्रों में संगठनात्मक कार्यशैली, नैतिक मूल्यों एवं प्रभावी रणनीतियों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्या भारती के अखिल भारतीय महामंत्री श्री अवनीश भटनागर ने आभार व्यक्त किया और अंत में वंदे मातरम् का सामूहिक गान हुआ। इस अभ्यास वर्ग ने कार्यकर्ताओं को नए दृष्टिकोण, समर्पण भाव और राष्ट्र निर्माण के प्रति संकल्पित होने की प्रेरणा प्रदान की।

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