IORA: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत हिंद महासागर क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियों को गति देने जा रहा है। भारत इस महीने के आखिर में हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) की विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। इस बैठक में क्षेत्र के कई अहम देश शामिल होंगे, जिनमें ईरान और यमन जैसे देश भी शामिल हैं। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE), दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, ओमान और इंडोनेशिया सहित अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के हिस्सा लेने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ रहा है। ऐसे में इस बैठक में ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, समुद्री मार्गों की स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी टकराव के कारण ऊर्जा परिवहन को लेकर पैदा हुई चिंताएं बैठक के एजेंडे में अहम स्थान रख सकती हैं।
IORA विदेश मंत्रियों की बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा
हिंद महासागर रिम एसोसिएशन की विदेश मंत्रियों की बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना है। मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए इस बार ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की निर्बाध आवाजाही जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर कई देशों की चिंताएं बढ़ी हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। भारत समेत हिंद महासागर क्षेत्र के कई देश ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं।
बैठक में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के क्षेत्रीय प्रभावों पर भी विचार-विमर्श हो सकता है। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर सदस्य देशों के बीच चर्चा होने की उम्मीद है।
IORA: भारत ने 2025 में संभाली थी IORA की अध्यक्षता
भारत ने वर्ष 2025 में हिंद महासागर रिम एसोसिएशन की अध्यक्षता संभाली थी। भारत का यह दो साल का कार्यकाल 2027 तक जारी रहेगा। अध्यक्ष के तौर पर भारत का प्रयास हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने और सदस्य देशों के बीच साझा चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वय मजबूत करने पर केंद्रित है।
IORA को लेकर भारत की प्राथमिकताएं उसके ‘सागर’ (SAGAR) विजन से भी जुड़ी हैं। SAGAR का पूरा नाम ‘Security and Growth for All in the Region’ है, जिसका अर्थ है क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास। इस विजन के तहत भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, आर्थिक विकास और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर देता रहा है।
भारत के लिए हिंद महासागर रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। देश का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री रास्तों से होता है। ऊर्जा संसाधनों के आयात और निर्यात के लिए भी इस क्षेत्र के समुद्री मार्ग अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में IORA के मंच पर सदस्य देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर काम करना भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है।
IORA के तहत आर्थिक विकास और समुद्री सुरक्षा पर होता है काम
हिंद महासागर रिम एसोसिएशन एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर से जुड़े देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। संगठन के प्रमुख क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा, व्यापार और निवेश, मत्स्य पालन, पर्यटन, आपदा जोखिम प्रबंधन, शिक्षा और ब्लू इकोनॉमी जैसे विषय शामिल हैं।
IORA के माध्यम से सदस्य देश क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देने और व्यापारिक गतिविधियों में आने वाली बाधाओं को कम करने की दिशा में काम करते हैं। संगठन का प्रयास वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और तकनीक के आदान-प्रदान को आसान बनाना भी है, ताकि हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हो सकें।
इसके अलावा समुद्री डकैती, अवैध गतिविधियों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए भी सदस्य देशों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है। हिंद महासागर में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा परिवहन का बड़ा हिस्सा होने के कारण समुद्री सुरक्षा इस संगठन के प्रमुख एजेंडों में शामिल है।
IORA में 23 सदस्य देश शामिल
हिंद महासागर रिम एसोसिएशन को पहले इंडियन ओशन रिम इनिशिएटिव (IORI) के नाम से जाना जाता था। यह संगठन हिंद महासागर से जुड़े देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसमें 23 सदस्य देश शामिल हैं, जो आर्थिक, व्यापारिक और समुद्री हितों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करते हैं।
संगठन का उद्देश्य केवल व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना नहीं है, बल्कि क्षेत्र में स्थिरता और सतत विकास को भी बढ़ावा देना है। सदस्य देशों के बीच नीतिगत समन्वय, निवेश को प्रोत्साहन और तकनीकी सहयोग के जरिए हिंद महासागर क्षेत्र को आर्थिक रूप से अधिक एकीकृत बनाने की दिशा में प्रयास किए जाते हैं।
मौजूदा पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत में होने वाली विदेश मंत्रियों की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर कई देशों को एक मंच पर चर्चा का अवसर मिलेगा। ईरान और यमन सहित अलग-अलग रणनीतिक हित रखने वाले देशों की भागीदारी इस बैठक को कूटनीतिक दृष्टि से भी अहम बनाती है।


