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Aadhaar Card को लेकर UIDAI का बड़ा कदम, नया Face Authentication Tool लॉन्च

Aadhaar Card

BY: Yoganand Shrivastava

Aadhaar Card आधार से जुड़ी पहचान सत्यापन प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने नया फेस ऑथेंटिकेशन टूल लॉन्च किया है। इसके साथ ही फेस ऑथेंटिकेशन सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट (SDK) और सैंडबॉक्स भी पेश किया गया है। इन सुविधाओं के जरिए बैंक, फिनटेक कंपनियां और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े अन्य संगठन अपने डिजिटल अनुप्रयोगों में आधार फेस ऑथेंटिकेशन को आसानी से जोड़ सकेंगे।

बैंक और फिनटेक कंपनियों के लिए आसान होगा वेरिफिकेशन

Aadhaar Card नए टूल की मदद से इकोसिस्टम पार्टनर अपने सर्वर से ग्राहकों का फेस ऑथेंटिकेशन कर सकेंगे। इससे पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से अधिक सहज तरीके से पूरा किया जा सकेगा। SDK को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के दौरान लॉन्च किया गया।

UIDAI के अनुसार, बैंक, फिनटेक कंपनियां और अन्य वित्तीय संस्थान इस सुविधा को अपने डिजिटल ऐप में इंटीग्रेट, टेस्ट और लागू कर सकेंगे। इससे उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग ऐप के बीच जाने की जरूरत कम होगी।

Android और iOS ऐप में सीधे जुड़ सकेगा Face Authentication

Aadhaar Card आधार फेस ऑथेंटिकेशन SDK को नेटिव Android और iOS ऐप में सीधे इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें AI और ML आधारित लाइवनेस डिटेक्शन तथा एंटी-स्पूफिंग क्षमताएं शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा से जुड़े जरूरी उपाय मौजूद रहें।

Aadhaar Card : SDK को ऑथेंटिकेशन डेटा को सुरक्षित तरीके से संभालने और एन्क्रिप्शन का समर्थन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे अलग-अलग तरह के उपभोक्ता स्मार्टफोन पर काम करने के हिसाब से तैयार किया गया है। सरकारी विभागों, बैंकों और अन्य संस्थानों के लिए इससे फेस ऑथेंटिकेशन आधारित सेवाओं को लागू करना आसान हो सकता है।

UIDAI ने लॉन्च किया सुरक्षित Sandbox

Aadhaar Card SDK के साथ UIDAI ने आधार फेस ऑथेंटिकेशन सैंडबॉक्स भी पेश किया है। यह एक नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण है, जहां संगठन किसी सुविधा को वास्तविक उपयोग में लाने से पहले पूरी प्रक्रिया को इंटीग्रेट और टेस्ट कर सकते हैं।

सैंडबॉक्स के जरिए डेवलपर्स और क्वालिटी जांच करने वाली टीमें यूजर प्रोविजनिंग, सहमति, फेस कैप्चर, लाइवनेस चेक, ऑथेंटिकेशन, त्रुटि प्रबंधन और प्रतिक्रिया सत्यापन जैसे चरणों की जांच कर सकेंगी। इसके लिए अलग बाहरी बायोमेट्रिक हार्डवेयर की जरूरत नहीं होगी।

इसके अलावा नेटवर्क में रुकावट, टाइमआउट, अमान्य डिजिटल हस्ताक्षर और संभावित स्पूफिंग प्रयास जैसी स्थितियों में सिस्टम के व्यवहार का परीक्षण भी किया जा सकेगा। इससे संस्थानों को फेस ऑथेंटिकेशन सेवा को लागू करने से पहले उसकी कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था जांचने में मदद मिलेगी।

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