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US-Iran War: अमेरिका ने ईरान के IRGC ठिकानों पर किया बड़ा हमला, जवाब में 13 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं; जॉर्डन-कुवैत-बहरीन में भी अलर्ट

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US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार देर रात ईरान के खिलाफ नए हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इस कार्रवाई में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके कुछ समय बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की।

अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान के खिलाफ की गई कार्रवाई हाल में होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों के जवाब में की गई। इस कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है और कई देशों ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है।

US-Iran War: अमेरिकी सेना ने IRGC के कई ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ हमलों का एक चरण पूरा किया है। इस अभियान में IRGC से जुड़े कई महत्वपूर्ण सैन्य संसाधनों को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई है।

अमेरिकी पक्ष के अनुसार, कार्रवाई के दायरे में एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री सैन्य संसाधन और उनसे जुड़ी सुविधाएं शामिल थीं। इसके अलावा ईरान की समुद्र में माइन बिछाने की क्षमता और संचार से संबंधित ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।

US-Iran War: होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का प्रमुख केंद्र

अमेरिकी कार्रवाई के पीछे होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई हालिया घटनाओं को प्रमुख वजह बताया गया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से क्षेत्रीय तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने बयान में कहा कि उसके सैनिकों और व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में ईरानी सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया।

US-Iran War: ईरान ने भी किया जवाबी हमला

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई। ईरानी हमलों का असर मध्य पूर्व के उन इलाकों में दिखाई दिया, जहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी है।

जॉर्डन में ईरान की ओर से बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद देश के कुछ हिस्सों में चेतावनी वाले सायरन बजाए गए और एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया।

US-Iran War: जॉर्डन पर दागी गईं 13 बैलिस्टिक मिसाइलें

जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली कुल 13 बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक किया गया। इनमें से 10 मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने रोककर नष्ट कर दिया, जबकि तीन मिसाइलें आबादी से दूर सुनसान इलाकों में जा गिरीं।

जॉर्डन के अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। मफराक और अकाबा प्रांतों में खतरे की चेतावनी के लिए सायरन भी बजाए गए।

US-Iran War: कुवैत और बहरीन में भी ड्रोन हमलों का खतरा

ईरान की जवाबी कार्रवाई का असर जॉर्डन तक सीमित नहीं रहा। कुवैत और बहरीन की ओर से भी ईरान से आने वाले ड्रोन हमलों को लेकर जानकारी दी गई है।

दोनों देशों ने संभावित हमलों से निपटने के लिए अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय किया। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों की मौजूदगी के कारण इन देशों की सुरक्षा स्थिति पर भी खास नजर रखी जा रही है।

US-Iran War: बहरीन में मौजूद है अमेरिकी पांचवीं फ्लीट

बहरीन इस पूरे घटनाक्रम में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यहां अमेरिकी नौसेना की पांचवीं फ्लीट का मुख्यालय स्थित है। यह बेड़ा मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के दौरान बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा बन गई है।

US-Iran War: अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी क्षेत्रीय चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य कार्रवाई बढ़ने के साथ पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है। एक तरफ अमेरिका ईरानी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले क्षेत्रों को जवाबी कार्रवाई का निशाना बना रहा है।

इस स्थिति में जॉर्डन, कुवैत और बहरीन जैसे देशों के लिए भी सुरक्षा चुनौती बढ़ गई है। इन देशों में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों की मौजूदगी के कारण वे संघर्ष के अप्रत्यक्ष प्रभाव की चपेट में आ सकते हैं।

US-Iran War: सैन्य कार्रवाई के बाद आगे क्या होगा

अमेरिकी हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव किस स्तर तक पहुंचता है। यदि हमले और जवाबी हमले जारी रहते हैं, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है।

विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी बड़े व्यवधान की स्थिति वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा सकती है। फिलहाल क्षेत्र के कई देशों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और हवाई खतरों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।

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