India Humanitarian Aid : नई दिल्ली, किसी देश की असली ताकत केवल उसकी सैन्य क्षमता या आर्थिक सामर्थ्य से नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में दूसरों के साथ खड़े होने की क्षमता से भी तय होती है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में आपदाग्रस्त देशों की मदद के जरिए मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। पड़ोसी देशों से लेकर हजारों किलोमीटर दूर स्थित देशों तक भारत ने राहत, बचाव, चिकित्सा और पुनर्निर्माण के अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
#WATCH | Nepal: Relief material by Rastriya Sarokar Manch, an organisation, being distributed across all flash-flood-affected areas, including Nuwakot District. pic.twitter.com/lKlK2uhfwY
— ANI (@ANI) August 31, 2026
India Humanitarian Aid : 26 अगस्त 2026 को नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत राहत और बचाव के लिए कई स्तरों पर सहायता पहुंचा रहा है। 31 अगस्त तक मुख्य मदद इस प्रकार है:
- 50 टन राहत सामग्री भेजी
भारत ने शुरुआती चरण में करीब 50 मीट्रिक टन राहत सामग्री नेपाल भेजी। इसमें आपदा प्रभावित लोगों के लिए जरूरी राहत और चिकित्सा सामग्री शामिल थी। - भारतीय वायुसेना के विमान से राहत सामग्री पहुंचाई
भारतीय वायुसेना ने बाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए C-130 परिवहन विमान के जरिए करीब 10 टन राहत और मेडिकल सामग्री भेजी। इसके बाद बड़े C-17 विमान के जरिए अतिरिक्त सहायता भेजने की तैयारी की गई। - सुरंगों में फंसे लोगों के रेस्क्यू में विशेषज्ञ सहायता
नेपाल के हाइड्रोपावर प्रोजेक्टों की सुरंगों में बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने के बाद भारत के टनल-रेस्क्यू विशेषज्ञों को नेपाल के बचाव अभियान में लगाया गया। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों ने नेपाली सेना के साथ मिलकर सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने में सहयोग किया। - भारतीय नागरिकों और अन्य विदेशी नागरिकों की मदद
बाढ़ में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए। भारत ने अपने नागरिकों की स्थिति की निगरानी और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास किए। व्यापक अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय सहायता भी शामिल रही। - हवाई और तकनीकी सहायता
बाढ़ ने सड़क, पुल और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। दुर्गम इलाकों में राहत पहुंचाने और रेस्क्यू अभियानों में भारतीय हवाई तथा तकनीकी सहायता का इस्तेमाल किया जा रहा है। 31 अगस्त की रिपोर्टों के मुताबिक हाइड्रोपावर साइटों पर चल रहे बचाव अभियानों में भारतीय सहायता भी शामिल है। - फोरेंसिक और DNA पहचान में सहयोग
आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत के बाद शवों की पहचान बड़ी चुनौती बन गई है। नेपाल को फोरेंसिक सहायता और DNA विश्लेषण में भारत का सहयोग मिल रहा है।
#WATCH | Nepal: Prateek Joshi, Rastriya Sarokar Manch, says, "This is the third batch we are sending. We are focusing on food and accommodation arrangements. The Govt has to look after a lot of things during a rescue operation. So, we did this on our own; we should help each… pic.twitter.com/v3SHPbscYQ
— ANI (@ANI) August 31, 2026
सबसे महत्वपूर्ण बात
नेपाल ने शुरुआत में विदेशी सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमों की व्यापक तैनाती को लेकर सीमित रुख अपनाया था, लेकिन बाद में सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों की सहायता ली गई।
यानी 26 अगस्त के बाद भारत की सहायता सिर्फ राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं रही, बल्कि मेडिकल सपोर्ट, एयरलिफ्ट, टनल रेस्क्यू, तकनीकी विशेषज्ञता, भारतीय नागरिकों की सहायता और शवों की पहचान तक पहुंची है।
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बीच भारत की ओर से राहत और बचाव प्रयासों ने एक बार फिर दोनों देशों के संबंधों में मानवीय सहयोग के महत्व को सामने ला दिया है। भारत की सहायता केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जरूरत पड़ने पर सड़क, पुल, स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में भी सहयोग दिया जाता है।
India Humanitarian Aid : नेपाल में राहत और पुनर्निर्माण पर जोर
नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बाद भारत ने राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग किया। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने के साथ ही संपर्क व्यवस्था बहाल करने पर भी ध्यान दिया गया। भारत और नेपाल के बीच भौगोलिक एवं सामाजिक निकटता के कारण ऐसी आपदाओं में दोनों देशों का सहयोग विशेष महत्व रखता है।

इससे पहले वर्ष 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भी भारत ने बड़े स्तर पर राहत और पुनर्निर्माण अभियान चलाया था। घरों के अलावा शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य सुविधाओं और सांस्कृतिक धरोहरों के पुनर्निर्माण में भी भारत ने सहयोग किया था।
India Humanitarian Aid : श्रीलंका में भी पहुंचाई मदद
भारत ने श्रीलंका में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी राहत अभियान चलाए हैं। चक्रवात और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में भारतीय नौसेना और वायुसेना ने राहत सामग्री पहुंचाने तथा प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में योगदान दिया।
आपदा के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं को बहाल करने के लिए भारत की ओर से चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई गई। मोबाइल चिकित्सा सुविधाओं और राहत सामग्री के माध्यम से प्रभावित आबादी तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया गया।
India Humanitarian Aid : म्यांमार में ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’
मार्च 2025 में म्यांमार में आए भीषण भूकंप के बाद भारत ने राहत अभियान शुरू किया था। ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत चिकित्सा दल, राहत सामग्री और जरूरी उपकरण म्यांमार भेजे गए। भारतीय टीमों ने प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में भी योगदान दिया।
भारत की ओर से फील्ड अस्पताल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं, ताकि भूकंप प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा उपचार मिल सके।
India Humanitarian Aid : तुर्की और सीरिया में ‘ऑपरेशन दोस्त’
फरवरी 2023 में तुर्की और सीरिया में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन दोस्त’ के तहत बड़े पैमाने पर सहायता भेजी थी। भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए राहत सामग्री, बचाव उपकरण और चिकित्सा दल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाए गए।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF की टीमों ने भी राहत एवं बचाव अभियान में हिस्सा लिया। भारत की ओर से चिकित्सा सुविधाओं के लिए फील्ड अस्पताल स्थापित किया गया, जहां भूकंप पीड़ितों को इलाज और आपातकालीन चिकित्सा सहायता दी गई।
तुर्की के साथ भारत के राजनीतिक संबंधों में मतभेदों के बावजूद मानवीय संकट के समय सहायता पहुंचाना इस बात का उदाहरण रहा कि भारत आपदा राहत को मानवीय दृष्टिकोण से देखता है।
India Humanitarian Aid : मोजाम्बिक में भी भारतीय मदद
2019 में चक्रवात इडाई से मोजाम्बिक में भारी तबाही हुई थी। उस समय भारत ने नौसेना के जहाजों के जरिए राहत सामग्री और बचाव दल भेजे। भारतीय जवानों ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ चिकित्सा सहायता और जरूरी सामान उपलब्ध कराने में योगदान दिया।
भारतीय नौसेना की ऐसी कार्रवाइयों ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका को मजबूत किया है।
India Humanitarian Aid : राहत से आगे पुनर्निर्माण तक भारत की भूमिका
आपदा राहत का पहला चरण लोगों की जान बचाना और तत्काल जरूरतों को पूरा करना होता है। इसके बाद प्रभावित क्षेत्र को दोबारा खड़ा करने की चुनौती सामने आती है। भारत ने कई देशों में राहत अभियान के साथ पुनर्निर्माण परियोजनाओं में भी भागीदारी की है।
स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल और आवास जैसी सुविधाओं को फिर से तैयार करने में सहयोग देकर भारत ने यह संदेश दिया है कि मानवीय सहायता केवल संकट के शुरुआती दिनों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। नेपाल हो, श्रीलंका, म्यांमार, तुर्की या मोजाम्बिक—प्राकृतिक आपदा के समय भारत की भूमिका उसकी ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की सोच को भी दर्शाती है। संकट में मदद का यह दृष्टिकोण भारत की वैश्विक छवि को मानवीय शक्ति के रूप में मजबूत करता है।




