BY: Yoganand Shrivastva
Nepal Flood नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद होने से प्रशासन के सामने उनकी पहचान और सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। कई शवों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। ऐसे में नेपाल सरकार ने शवों की पहचान भविष्य में सुनिश्चित करने के लिए DNA सैंपलिंग और विशेष तरीके से शवों को दफनाने की व्यवस्था शुरू की है।

DNA सैंपल से होगी मृतकों की पहचान
Nepal Flood बाढ़ और मलबे के बीच बरामद हो रहे शवों में कई ऐसे हैं, जिनकी पहचान तत्काल संभव नहीं है। डॉक्टर शवों के DNA सैंपल सुरक्षित कर रहे हैं। इसके साथ ही शरीर पर मौजूद किसी खास निशान, कपड़े और शव मिलने की जगह जैसी जानकारियों को भी रिकॉर्ड किया जा रहा है। भविष्य में लापता लोगों के परिजनों के DNA से मिलान कर मृतकों की पहचान की जा सकेगी।
एयरटाइट बैग में दफनाए जा रहे शव
Nepal Flood मुर्दाघरों में जगह कम पड़ने और शवों के तेजी से खराब होने के कारण प्रशासन ने अज्ञात शवों को एयरटाइट बैग में रखकर जमीन में दफनाना शुरू किया है। शवों को करीब 1.5 मीटर गहराई में रखा जा रहा है। दो शवों के बीच लगभग 40 सेंटीमीटर की दूरी रखी जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर DNA मिलान के बाद संबंधित शव को दोबारा निकाला जा सके। दफन स्थल की पहचान के लिए साइनबोर्ड लगाने के साथ पूरी प्रक्रिया की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है।

700 से ज्यादा शव बरामद, हजारों अब भी लापता
Nepal Flood नेपाल में बाढ़ के बाद अब तक 700 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव अभियान लगातार जारी है और आने वाले दिनों में मलबे से और शव मिलने की आशंका है। प्रशासन के सामने एक तरफ राहत और बचाव अभियान चलाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर मृतकों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार और उनकी पहचान सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी है।


