बिल्डिंग खाली कराए बिना की जा रही तोड़फोड़
- भोपाल में हाउसिंग बोर्ड का रीडेवलपमेंट प्लान में मनमानी
- हैरान लोग, रहवासियों के लिए बनी परेशानी
- अधर में जर्जर भवनों का री-डेवलपमेंट प्लान
- रहवासियों की बिना सहमति तोड़े जा रहे मकान
- रहवासियों की जान से खिलवाड़ कर रहा हाउसिंग बोर्ड
- होता है कोई हादसा, तो जिम्मेदार कौन ?
- अफसरों की मनमानी, रहवासियों की परेशानी

भोपाल: मध्यप्रदेश में लोगों को सुरक्षित और बेहतर आवास देन के उदेश्य से राज्य सरकार ने प्रदेश की 40 साल से ज्यादा पुरानी या जर्जर इमारतों और बिल्डिंग को रीडेवलपमेंट के लिए रीडवलपमेंट पॉलिसी 2022 को मंजूरी दी थी … जिसके तहत राज्य सरकार ने पॉलिसी के अंतर्गत इसका प्रथम फेज भोपाल से ही शुरु किया… रविशंकर मार्केट की कॉमर्शियल बिल्डिग समेंत आस पास के फ्लेट को इसमें शामिल किया गया … लेकिन अब रीडवलपमेंट पॉलिसी को लेकर असमंजस की स्थिती बनती नजर आ रही है … क्यों बन रही है असमंजस की स्थिती , क्या हाउसिंग बोर्ड ने नही दी लोगों को पॉलिसी की जानकारी, क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी … आपको बताएंगे … हमारी इस रिपोर्ट में
क्या खास है रीडवलमेंट पॉलिसी में
दरअसल बीडीए हाउसिंग बोर्ड और निजी संस्थाओं या बिल्डर्स द्वारा बनाई गई 40 साल से पुरानी और जर्जर हो चुकी इमारतों को रीडवलप करने के लिए शासन ने 2022 में ये पॉलिसी बनाई … पॉलिसी के अंतर्गत पहले फेज में भोपाल के रविशंकर नगर , टीटी नगर स्थित त्रिवेणी और ताप्ति कॉम्पलेक्स के साथ ही सरस्वती नगर और शास्त्री नगर को इसमें शामिल किया गया … जहां 40 साल पूरी कर चुकी या जर्जर हो चुकी इमारतों को चिन्हित करने के साथ ही … इन्हे रीडवलप करने का प्लान तैयार हुआ … सबसे पहले आपको बताते है क्या है ये

ये है रीडवलमेंट पॉलिसी
–हाउसिंग बोर्ड और बीडीए जैसी संस्थाओं की पुरानी इमारतों को दुबारा से बनाने की पॉलिसी
-निजी डेवलपर्स की पुरानी कॉलोनियों को भी किया गया शामिल
-साल 2022 में जारी हुई रीडेवलपमेंट पॉलिसी हुई लागू
-पॉलिसी के तहत मौजूदा ऑनर को 20% बड़ा फ्लैट मुफ्त में दिए जाने की योजना
-रजिस्ट्री में स्टाम्प ड्यूटी से भी छूट दी जानी है
-यह सुविधा देने को 0.5 एफएआर अतिरिक्त देना होगा
-40% अतिरिक्त ग्राउंड कवरेज देना होगा
-0.75% कमर्शियल डेवलपमेंट सहित कुछ अन्य सुविधाएं देने की बात भी पॉलिसी में शामिल है
-इन्हीं के आधार पर हाउसिंग बोर्ड ने ऑफर बुलाए थे
-भोपाल का रविशंकर शुक्ल मार्केट प्रदेश का पहला प्रोजेक्ट था,
जिस पर धरातल पर काम शुरू हुआ।
-शास्त्री नगर और सरस्वती नगर प्रोजेक्ट पर अभी टेंडर प्रक्रिया चल रही है
-50% मकान मालिक सहमत, तभी शुरू हो सकता है प्रोजेक्ट
रीडेवलपमेंट पॉलिसी में एक शर्त यह है कि 50% मकान मालिकों की सहमति के बाद ही प्रोजेक्ट शुरू हो सकता है… सबसे पहले बात करेंगे … रविशंकर मार्केट की मल्टियों की.. यहां कई रहवासी इसके समर्थन में हैं तो कई … इसके विरोध में …और इसके भी दो कारण है… क्योकिं कई मकान मालिकों के पास यहां मालिकाना हक के दस्तावेज ही नहीं हैं… कुछ रोडवेज के फ्लेट्स हैं … जिनका प्रकरण कोर्ट में लंबित है … इसके अलावा बुजुर्ग मकान मालिक मकान भी खाली करने को राजी नहीं हैं…तो कुछ राजी हैं … जिन्होंने सहमति पत्र दे दिए हैं …जिसके बाद अब हाउसिंग बोर्ड ने इन मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरु कर दी है …लेकिन जिन मकानों के सहमति पत्र मिल गए हैं … तो हाउसिंग बोर्ड ने उन्हे गिराने की तैयारी शुरु कर दी है … जिसके कारण ऊपर के फ्लोर पर तोड़फोड की जा रही है …. और ग्राउंड फ्लोर पर अभी भी लोग रह रहे हैं … जो इससे दशहत में है … लोगों की माने तो हमसे इसके लिए कोई सहमति नहीं ली गई और ना ही हाउसिंग बोर्ड ने नोटिस दिया … इसलिये हमने मकान खाली नहीं किया … अधिकारी हम पर मकान खाली करने का दवाब बना रहे है.

रविशंकर मार्केट के ही कनिष्क अपार्टमेंट
रविशंकर मार्केट के ही कनिष्क अपार्टमेंट में रहने वाले सड़क परिवहन निगम से सेवानिवृत सुभाष चंद्र जैन भी यही रहते है … उनका कहना है कि अभी उनके फ्लेट का मामले में कोर्ट का स्टे है … वें बुजुर्ग है … और उन्होंने कोई सहमति नहीं दी है … लेकिन हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारी यहां आसपास के फ्लेट्स में तोड़ फोड़ कर रहे है … जिससे उनके परिवार की जान को खतरा हो सकता है …
यहीं मल्टी में प्रतिभा पवार भी यहां करीब 35 सालों से रह रही है … रीडवलमेंट पॉलिसी के तहत इनके घर को भी तोड़ा जाना है … मल्टी को खाली करने के लिए इनके घर के बाहर ही हाउसिंग बोर्ड का नोटिस लगा है … लेकिन ये घर छोड़ने को तैयार नहीं है … क्योकिं ये अकेली ही पूरे परिवार का भरण पोषण करती हैं … पति विकलांग है … तो सांस भी बैड पर है … और वें आसपास के बच्चों को कोचिंग पढ़ाकर दोनों का इलाज कराकर जैसे तैसे परिवार का भऱणपोषण कर पाती है … अगर उन्होंने घर खाली कर दिया तो … उनके सामने जीवन यापन का संकट होगा
रविशंकर मार्केट की रीडवलपमेंट प्रोजेक्ट हाउसिंग बोर्ड की सहायक यंत्री नैना शर्मा ने बताया कि रीडवलमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 1974 में बने ये जर्जर हो चुके मकानों को तोड़कर दुबारा से बनाया जाएगा …लोगों से सहमति ली गई है … ये प्रोजेक्ट 6.34 एकड़ का है …
वही बात हाउसिंग बोर्ड भोपाल के संभाग एक में आने वाले त्रिवेणी, ताप्ति अपार्टेमेंट और सरस्वती नगर और शास्त्री नगर की तो … त्रिवेणी और ताप्ति अपार्टमेंट के अधिकांश रहवासी रीडवलपमेंट के लिए तैयार है … लेकिन अभी इस प्रापर्टी का आधिपत्य हाउसिंग बोर्ड के पास नहीं है … यही कारण है कि इसको दूसरे फेस में पूरा किया जाएगा … जबकि शास्त्री नगर और सरस्वती नगर की मल्टियों को तोड़ने के साथ रीडवलमेंट का काम जल्द ही शुरु हो सकता है …यहां के रहवासी इसके लिए तैयार भी है … लेकिन कुछ रहवासी हाउसिंग बोर्ड द्वारा सम्पूर्ण जानकारी नहीं देने की बात कह रहे हैं… तो वही स्थानीय रहवासी समिति के सचिव हाउसिंग रेट बढाने के साथ ही मौजूदा स्थिति से 20 प्रतिशत की जगह 50 प्रतिशत बढ़ाकर मकान दिए जाने की मांग कर रहे हैं … और इसका पूरा प्लान मांग रहे हैं …
हाउसिंग बोर्ड भोपाल ने ये कहा
तो वही इसको लेकर हाउसिंग बोर्ड के एई जितेंद्र अहिरवार ने बताया कि सरस्वती नगर 19.21 एकड़ और शास्त्री नगर का 11 एकड़ का रीडवलमेंट प्रोजेक्ट है … जिसके लिए लोगों से सहमति ली जा रही है … जल्द ही इन्हे तोड़ने का काम किया जाएगा … अभी बिल्डिंग का फाईनल ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है … जिसके तैयार होने के साथ ही आगे की कार्रवाई की जाएगी
कुल मिलाकर रीडवलमेंट पॉलीसी और चिन्हित जर्जर मकानों को तोड़कर नए बनाने का निर्णय हाउसिंग बोर्ड ने तो कर लिया है … जो अच्छा भी है … लेकिन इसको लेकर लोगों के मन में असमंजस की स्थिती है … यही कारण है कि प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए रविशंकर नगर के प्रोजेक्ट में तो … हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी व्यक्तिगत सहमति मिलते ही … उक्त फ्लेट के खिड़की दरवाजे तुरंत निकाल रहे हैं … जिससे रहवासी दुबारा से उक्त बिल्डिंग में ना रह सकें… जबकि नियम ये कहता है कि व्यक्तिगत की जगह स्थानीय सोसायटी से सहमति ली जाएं… बहरहाल ऐसे में देखना ये है कि अब क्या हाउसिंग बोर्ड प्रबंधन जल्द ही मामले में असमंजस्स की स्थिती को कब तक दूर कर पाता है … क्योकिं कि बिना स्थानियों की सहमति के ये प्रोजेक्ट पूरा होना ना सिर्फ मुश्किल होगा … बल्कि विवाद की स्थिती बनने से आगामी प्रोजेक्ट में भी बाधाएं आएगी … ऐसे में देखना होगा कि हाउसिंग बोर्ड इसके लिए क्या करता है।
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