Isa Ahmad
Hareli Festival in Chhattisgarh में हरियाली और खुशहाली का उत्सव
Hareli Festival in Chhattisgarh: प्रदेशभर में हरेली पर्व को लेकर उत्साह का माहौल है। हरियाली, कृषि और खुशहाली से जुड़े इस पारंपरिक त्योहार को छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में पूरे रीति-रिवाज और उत्साह के साथ मनाया जाता है। महासमुंद जिले में भी हरेली की रौनक खेत-खलिहानों से लेकर गांव के घर-आंगन तक दिखाई दे रही है।
हरेली पर्व को किसानों के लिए विशेष महत्व वाला त्योहार माना जाता है। इस अवसर पर किसान अपनी खेती-किसानी में इस्तेमाल होने वाले औजारों और पशुधन की पूजा करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही लोग पर्व की तैयारियों में जुट जाते हैं और पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
Hareli Festival in Chhattisgarh पर कृषि औजारों और पशुधन की पूजा
Hareli Festival in Chhattisgarh: हरेली के दिन किसान अपने खेतों और कृषि उपकरणों को विशेष रूप से साफ करते हैं। इसके बाद कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाले औजारों की पूजा की जाती है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में घर और खेत के आसपास महुआ तथा नीम की डालियां लगाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
पशुधन भी इस पर्व का अहम हिस्सा है। किसान अपने मवेशियों की पूजा करते हैं और उनके स्वस्थ रहने की कामना करते हैं। इसके साथ ही ग्राम देवी-देवताओं और कुल देवी-देवताओं की पूजा कर अच्छी बारिश, बेहतर फसल और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की जाती है।

Hareli Festival in Chhattisgarh में छत्तीसगढ़ी पकवानों की खुशबू
Hareli Festival in Chhattisgarh: पर्व का उत्साह केवल पूजा और कृषि परंपराओं तक सीमित नहीं रहता। हरेली के अवसर पर घरों में तरह-तरह के पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाए जाते हैं। गुड़ का चीला, खुरमी, ठेठरी और बड़ा जैसे पकवान तैयार कर पहले देवी-देवताओं को भोग लगाया जाता है।
Hareli Festival in Chhattisgarh: ग्रामीण परिवारों में इस दिन रिश्तेदारों और परिचितों के साथ मिलकर पर्व मनाने की परंपरा भी देखने को मिलती है। घरों में बनने वाले पारंपरिक पकवान हरेली की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करते हैं।
Hareli Festival in Chhattisgarh में गेड़ी बनी बच्चों के आकर्षण का केंद्र
हरेली पर्व का सबसे खास आकर्षण बच्चों और युवाओं के लिए गेड़ी चढ़ना माना जाता है। बांस से तैयार की जाने वाली गेड़ी पर चढ़कर बच्चे और युवा गांवों में उत्साह के साथ पर्व का आनंद लेते हैं।
Hareli Festival in Chhattisgarh: गेड़ी की परंपरा इस त्योहार को खास बनाती है। गांवों में बच्चे सुबह से ही गेड़ी लेकर निकल पड़ते हैं और एक-दूसरे के साथ प्रतियोगिता करते हुए त्योहार का आनंद लेते हैं। इससे नई पीढ़ी भी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ती है।
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खेत-खलिहान से घर-आंगन तक छाई हरेली की रौनक
Hareli Festival in Chhattisgarh: महासमुंद सहित प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में हरेली पर्व कृषि संस्कृति और लोक परंपराओं के जीवंत मेल का प्रतीक बना हुआ है। खेतों में पूजा-अर्चना, पशुधन के प्रति सम्मान, पारंपरिक पकवान और गेड़ी जैसे आयोजन इस त्योहार को खास बनाते हैं।
Hareli Festival in Chhattisgarh: हरेली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि आधारित जीवनशैली, लोक आस्था और सामुदायिक संस्कृति से जुड़ा उत्सव है। हरियाली और खुशहाली की कामना के साथ मनाया जाने वाला यह त्योहार ग्रामीण जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह लेकर आता है।



