BY
Yoganand Shrivastava
Kottankulangara Devi Temple: भारत में आस्था और परंपराओं के कई अनूठे स्वरूप देखने को मिलते हैं। इन्हीं में से एक है केरल के कोल्लम जिले में स्थित कोट्टनकुलंगरा देवी मंदिर, जो अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां आयोजित होने वाले ‘चामयाविलक्कु’ उत्सव के दौरान पुरुष महिलाओं की तरह साड़ी पहनकर और 16 श्रृंगार करके देवी की पूजा-अर्चना करते हैं।
दो दिवसीय इस विशेष उत्सव में हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं और देवी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
Kottankulangara Devi Temple साड़ी, श्रृंगार और विशेष पूजा का विधान
उत्सव के दौरान पुरुष केवल साड़ी ही नहीं पहनते, बल्कि महिलाओं की तरह मेकअप, आभूषण और बालों में फूल भी सजाते हैं। मंदिर परिसर के आसपास श्रद्धालुओं को तैयार करने के लिए मेकअप आर्टिस्ट और ब्यूटी स्टॉल भी लगाए जाते हैं।
मान्यता है कि इस विशेष रूप में देवी की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Kottankulangara Devi Temple चरवाहों की कथा से जुड़ी है मान्यता
मंदिर से जुड़ी लोककथा के अनुसार, सदियों पहले कुछ चरवाहे लड़के मनोरंजन के लिए महिलाओं का वेश धारण कर देवी की पूजा किया करते थे। कहा जाता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी वहां प्रकट हुईं और उन्हें आशीर्वाद दिया।
तभी से यह परंपरा चली आ रही है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ महिला स्वरूप में देवी की पूजा करने पर मां अपनी कृपा बरसाती हैं और भक्तों की इच्छाएं पूरी करती हैं।
आज यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि केरल की सांस्कृतिक विरासत और अनूठी परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।



