CJP: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की प्रवक्ता और अधिवक्ता रत्ना सिंह ने दावा किया है कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां और नफरत भरे संदेश भेजे जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले आंदोलन ने उन्हें मानसिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया है। उनका कहना है कि आंदोलन के दौरान मिली चुनौतियों ने उन्हें आलोचनाओं और दबाव के बीच भी अपने उद्देश्य पर केंद्रित रहना सिखाया।
रत्ना सिंह का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के परिवार ने भी कथित धमकियों को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
CJP: सोशल मीडिया पोस्ट में साझा किया अपना अनुभव
रत्ना सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि लोगों की राय, आलोचना और नकारात्मक टिप्पणियां उनके काम से बड़ी नहीं हो सकतीं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान उन्होंने यह सीखा कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना और अपने लक्ष्य पर फोकस करना सबसे जरूरी होता है।
My DMs are filled with death threats, abusive messages, and an endless stream of hateful tweets and comments.
— Ratna Singh (@whattalawyer) July 29, 2026
Somehow, none of it bothers me anymore.
No amount of judgment can outweigh the work we have done. No sane person says things they wouldn't want to hear themselves.…
उन्होंने यह भी कहा कि लगातार मिल रही आलोचनाओं और नफरत के बावजूद वह अपने दायित्वों का निर्वहन करती रहेंगी।
CJP: आंदोलन ने मुश्किल हालात में मजबूत बनाया
रत्ना सिंह के अनुसार, जंतर-मंतर पर चला 36 दिनों का आंदोलन उनके जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसी अनुभव ने उन्हें अफरा-तफरी के माहौल में भी शांत रहकर काम करना सिखाया।
उन्होंने लिखा कि अब वह नफरत भरे संदेशों या व्यक्तिगत टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।
CJP में कानूनी मामलों की प्रमुख जिम्मेदारी संभालती हैं रत्ना सिंह
रत्ना सिंह कॉकरोच जनता पार्टी की मुख्य समन्वय टीम का अहम हिस्सा मानी जाती हैं। संगठन की ओर से कानूनी मामलों में वह प्रमुख संपर्क अधिकारी की भूमिका निभाती रही हैं।
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर, हिरासत में लिए गए छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और संगठन पर लगे आरोपों का जवाब देने की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली।
CJP: अभिजीत दिपके के पिता ने भी लगाए धमकी के आरोप
इस बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके ने भी परिवार को धमकी मिलने का दावा किया है। उनके अनुसार, मई के मध्य में परिवार ने एक वीडियो देखा था, जिसमें कथित तौर पर चेतावनी दी गई थी कि यदि अभिजीत दिपके भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल नहीं होते हैं तो उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
भगवानराव दिपके ने यह भी कहा कि संदेश भेजने वालों को उनके परिवार के निवास स्थान की जानकारी होने का दावा किया गया था, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई।
CJP: सादगी से कराया गया अभिजीत दिपके का स्वागत
भगवानराव दिपके के अनुसार, संभावित सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त होने के बाद अभिजीत दिपके की घर वापसी को बेहद सादे तरीके से आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की भीड़ या सार्वजनिक आयोजन से बचने का फैसला परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।
CJP: प्रधानमंत्री मोदी पर भी साधा निशाना
अपने गृह नगर पहुंचने के बाद अभिजीत दिपके ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अधिक गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
दिपके ने यह भी कहा कि यदि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो CJP भविष्य में फिर से बड़ा आंदोलन शुरू करने पर विचार कर सकती है।
CJP: छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग दोहराई
अभिजीत दिपके ने कहा कि संगठन की प्रमुख मांगों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल है। उनका कहना है कि यदि सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी युवाओं में असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
CJP: आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं
रत्ना सिंह और भगवानराव दिपके द्वारा लगाए गए धमकी संबंधी आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी या आधिकारिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में संबंधित पक्षों की विस्तृत प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आगे जांच या आधिकारिक बयान आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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