by: vijay yadav
China Fusion Energy Project : स्वच्छ और लगभग असीमित ऊर्जा की तलाश में चीन ने अपने महत्वाकांक्षी न्यूक्लियर फ्यूजन कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। चीन के वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे बड़ा सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट तैयार कर उसका सफल परीक्षण किया है। यह परियोजना चीन की चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के अंतर्गत आने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ प्लाज्मा फिजिक्स द्वारा विकसित की जा रही है और इसे लोकप्रिय रूप से ‘आर्टिफिशियल सन’ कहा जा रहा है।

China Fusion Energy Project : क्या है ‘आर्टिफिशियल सन’?
यह कोई वास्तविक सूरज नहीं, बल्कि न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर है। फ्यूजन वही प्रक्रिया है जो सूर्य और अन्य तारों के केंद्र में होती है। इसमें हाइड्रोजन के हल्के परमाणुओं को अत्यधिक तापमान और दबाव में आपस में मिलाया जाता है, जिससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है।
合肥核聚变项目,目前已进入聚变能开发应用“三步走”战略中的第一步,2022年至2035年,完成聚变能实验堆发电示范,2030年至2040年,完成聚变工程堆发电示范,2040年至2050年,完成聚变商业堆商业应用。 https://t.co/rYQA19f8vi pic.twitter.com/YqfX23lJjE
— 小陆师傅 (@STANLEES4) March 16, 2025
वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्रक्रिया में 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान उत्पन्न किया जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तरह कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता, इसलिए इसे भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा तकनीक माना जा रहा है।
China Fusion Energy Project : कितना बड़ा है यह फ्यूजन मैग्नेट?
चीन द्वारा विकसित यह D-आकार का सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट आकार और क्षमता दोनों के लिहाज से बेहद विशाल बताया जा रहा है।
लंबाई: लगभग 21 मीटर
चौड़ाई: लगभग 12 मीटर
वजन: करीब 582 टन
चीनी वैज्ञानिकों का दावा है कि यह दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन प्रोजेक्ट ITER (International Thermonuclear Experimental Reactor) में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेट से भी बड़ा है और इसकी ऊर्जा भंडारण क्षमता उससे कई गुना अधिक हो सकती है।
China Fusion Energy Project : यह तकनीक काम कैसे करती है?
फ्यूजन रिएक्टर के अंदर हाइड्रोजन गैस को इतना गर्म किया जाता है कि वह प्लाज्मा में बदल जाती है। इतनी अधिक गर्मी में कोई भी ठोस पदार्थ सीधे संपर्क में आने पर पिघल सकता है। इसलिए प्लाज्मा को रिएक्टर की दीवारों से दूर रखने के लिए अत्यंत शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड का उपयोग किया जाता है।
इसके साथ चीन ने एक हाई-टेम्परेचर सुपरकंडक्टिंग सेंट्रल सोलेनॉइड कॉइल का भी परीक्षण किया है। यह कॉइल फ्यूजन प्रतिक्रिया को शुरू करने और प्लाज्मा को लगातार सक्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
China Fusion Energy Project : पूरी तरह स्वदेशी तकनीक का दावा
चीनी संस्थानों का कहना है कि इस प्रणाली के निर्माण में इस्तेमाल अधिकांश उपकरण, सामग्री और तकनीक घरेलू स्तर पर विकसित की गई है। इस मैग्नेट को अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है, जहाँ एक ओर तापमान -269°C तक गिर सकता है और दूसरी ओर रिएक्टर के भीतर अत्यधिक गर्मी और रेडिएशन मौजूद रहता है।
इंजीनियरों ने इसके विद्युत जोड़ों में प्रतिरोध को लगभग शून्य के करीब रखने की कोशिश की है, ताकि 1 लाख एम्पीयर से अधिक करंट बिना ऊर्जा हानि के प्रवाहित किया जा सके।
China Fusion Energy Project : 2030 तक बिजली उत्पादन का लक्ष्य
चीन ने फ्यूजन ऊर्जा को व्यावसायिक बिजली उत्पादन तक पहुँचाने के लिए चरणबद्ध योजना बनाई है।
2027 तक – उन्नत सुपरकंडक्टिंग टोकामक परीक्षण प्रणाली को पूरा करना।
2030 तक – फ्यूजन ऊर्जा से पहली बार बिजली उत्पादन का प्रदर्शन करना।
इसके बाद – दुनिया का पहला फ्यूजन डेमो पावर स्टेशन विकसित करना।
China Fusion Energy Project : अभी किन चुनौतियों का सामना है?
हालाँकि यह उपलब्धि तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन फ्यूजन ऊर्जा को व्यावसायिक स्तर तक पहुँचाने में अभी कई बड़ी चुनौतियाँ बाकी हैं।
लंबे समय तक स्थिर प्लाज्मा बनाए रखना
रिएक्टर की सामग्री को अत्यधिक तापमान और रेडिएशन से सुरक्षित रखना
यह साबित करना कि रिएक्टर जितनी ऊर्जा खर्च करता है, उससे अधिक ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है
यदि वैज्ञानिक इन चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार कर लेते हैं, तो न्यूक्लियर फ्यूजन भविष्य में दुनिया की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाली सबसे बड़ी और स्वच्छ तकनीकों में से एक बन सकता है।
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