VIP Helipad Construction: राजनांदगांव में उपराष्ट्रपति के आगमन के लिए बनाए गए हेलीपैड को लेकर अब निर्माण की तारीख और माप बुक में दर्ज प्रविष्टियों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोक निर्माण विभाग यानी PWD के दस्तावेजों में हेलीपैड निर्माण की जरूरत 5 नवंबर 2025 को उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम के मद्देनजर बताई गई थी। वहीं सामने आए माप बुक के रिकॉर्ड में निर्माण और माप से जुड़ी कुछ प्रविष्टियां 5 नवंबर के बाद की तारीखों में दर्ज दिखाई देने की बात सामने आई है।
VIP Helipad Construction: मामला राजनांदगांव के रक्षित आरक्षी केंद्र में बनाए गए हेलीपैड से जुड़ा है। लोक निर्माण विभाग ने इसके निर्माण के लिए करीब 9 लाख 73 हजार रुपये का अनुमान तैयार किया था। एस्टीमेट में VIP कार्यक्रम और उपराष्ट्रपति के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए हेलीपैड निर्माण को आवश्यक बताया गया था।
VIP Helipad Construction: 9.73 लाख के निर्माण में मिट्टी खुदाई से लेकर PQC तक का काम
VIP Helipad Construction: विभागीय एस्टीमेट में हेलीपैड निर्माण के लिए कई तरह के निर्माण कार्यों का उल्लेख किया गया था। इसमें मिट्टी की खुदाई, सबग्रेड तैयार करना, DLC, PQC कंक्रीट, ड्रेनेज सहित अन्य कार्य शामिल बताए गए हैं। VIP के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग से जुड़े होने के कारण इस निर्माण में तकनीकी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।
VIP Helipad Construction: रिपोर्ट के अनुसार, अब माप बुक के पन्नों में दर्ज माप और उनके सत्यापन की तारीखों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि जब हेलीपैड का निर्माण उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम के लिए जरूरी बताया गया था, तो निर्माण कार्य और उससे संबंधित माप की प्रविष्टियां किन तारीखों में की गईं और उनका सत्यापन कब हुआ।
VIP Helipad Construction: दस्तावेजों में दिखाई दे रही तारीखों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि यह कोई सामान्य निर्माण कार्य नहीं था। हेलीपैड का इस्तेमाल उपराष्ट्रपति के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए किया जाना था। ऐसे में निर्माण की वास्तविक तारीख, कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों के पालन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच अहम हो जाती है।
VIP Helipad Construction: अधिकारी ने कैमरे पर पक्ष रखने से किया इनकार
VIP Helipad Construction: सामने आए दस्तावेजों के आधार पर उठ रहे सवालों को लेकर संबंधित जिम्मेदार अधिकारी से कैमरे पर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारी ने कैमरे पर बाइट देने से इनकार कर दिया। ऐसे में फिलहाल विभागीय दस्तावेजों में दर्ज तारीखों और निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल ब
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