Bhopal Master Plan : 31 साल से इंतजार, कब मिलेगी राजधानी को रफ्तार ? मास्टर प्लान पर महाभारत, शहर के विकास पर सियासत
Bhopal Master Plan : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नया मास्टर प्लान लागू नहीं किए जाने को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। राजधानी का मास्टर प्लान लागू कराने की मांग को लेकर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने रोशनपुरा चौराहे पर 31 घंटे का उपवास शुरू कर दिया। उनके साथ पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह, अरुणेश्वर शरण सिंह देव, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी सहित कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद हैं।इससे पहले कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भोपाल में ‘रन फॉर मास्टर प्लान’ का आयोजन कर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई थी।कांग्रेस का आरोप है कि साल 1995 के बाद से शहर को नया मास्टर प्लान नहीं मिला है और वर्षों से प्लान तैयार होने के बावजूद बीजेपी सरकार इसे लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखा रही है। पीसी शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सीलिंग और बुलडोजर की कार्रवाई से व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि बीजेपी और आरएसएस के कार्यालय भी आवासीय क्षेत्र में हैं, तो क्या नियमों के तहत पहले उन पर कार्रवाई की जाएगी ? मास्टर प्लान आने से आम जनता और व्यापारियों को राहत मिलेगी तथा दलालों की मनमानी खत्म होगी। तो वहीं सत्ताधारी दल ने कांग्रेस के इस विरोध को राजनीतिक नाटक करार दिया है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस के स्थानीय नेता ही मास्टर प्लान को लेकर विरोधाभासी कदम उठा रहे हैं और जनता के बीच भ्रम फैला रहे हैं।।।
Bhopal Master Plan : पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार के पास अपने कार्यालय के मास्टर प्लान और उसके ऊपर हेलीपैड बनाने की योजना के लिए समय है, लेकिन भोपाल के मास्टर प्लान को लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं है। पीसी शर्मा ने कहा कि भोपाल का आखिरी मास्टर प्लान 1995 में दिग्विजय सिंह सरकार के समय लागू हुआ था। नियम के अनुसार हर दस साल में मास्टर प्लान आना चाहिए, लेकिन 2005 के बाद इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार के दौरान 2031 का मास्टर प्लान तैयार कर 6-7 मार्च 2020 को प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया होनी थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने इसे लागू नहीं किया। पीसी शर्मा ने कहा कि मास्टर प्लान लागू होने पर आम नागरिकों को आवासीय निर्माण, व्यवसाय और दूसरी गतिविधियों के लिए तय नियमों के तहत अनुमति मिल जाएगी। इससे नेताओं और दलालों के जरिए परमिशन दिलाने की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण मास्टर प्लान को लंबित रखा जा रहा है।पूर्व मंत्री ने कहा कि सीलिंग की कार्रवाई से ऐसे लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है, जिनकी आजीविका व्यवसाय और व्यापार से चलती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि करीब पांच लाख लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित न हो और मास्टर प्लान लागू कर व्यवसायिक गतिविधियों को व्यवस्थित किया जाए। उन्होंने 15 तारीख को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार की ओर से व्यापारियों के पक्ष में कोई ठोस प्रस्ताव या तैयारी दिखाई नहीं दे रही है। शर्मा ने कहा कि उनकी मांग स्पष्ट है—मास्टर प्लान लागू करो और भोपाल को बचाओ।
Bhopal Master Plan : भोपाल के बाहरी इलाकों में अव्यवस्थित विकास हो रहा है। कहीं भी निर्माण और दूसरी गतिविधियां हो रही हैं। मास्टर प्लान लागू होता तो ग्रीन बेल्ट, आवासीय और व्यवसायिक क्षेत्रों की स्पष्ट व्यवस्था होती और राजधानी का विकास व्यवस्थित तरीके से होता। पीसी शर्मा ने कहा कि भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियों को लेकर सीलिंग की कार्रवाई से व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने सरकार से मिक्स लैंडयूज की अनुमति देकर आवासीय और व्यवसायिक दोनों वर्गों को राहत देने की मांग की। साथ ही कहा कि नए व्यवसायिक क्षेत्र और मार्केट विकसित किए जाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकारों ने न्यू मार्केट और एमपी नगर जैसे बाजार विकसित किए थे।
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