Madras High Court का बड़ा आदेश, बकरीद पर गाय और बछड़ों की कुर्बानी पर रोक लगाने के निर्देश

- Advertisement -
Swadesh NewsAd image
https://swadeshlive.com/madras-high-court-bakrid-order/

Madras High Court: मद्रास हाई कोर्ट ने बकरीद के दौरान गाय और बछड़ों की कुर्बानी को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि राज्य में बकरीद समेत किसी भी अवसर पर गाय और बछड़ों के वध पर कानून के अनुसार सख्ती से रोक सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस्लाम धर्म में बकरीद पर गाय की कुर्बानी देना अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं माना जाता।

Madras High Court: जनहित याचिका पर सुनाया गया फैसला

यह फैसला जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मणन की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत में यह मामला कोयंबटूर निवासी के. सूर्या की ओर से दायर जनहित याचिका के जरिए पहुंचा था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बकरीद के मौके पर कई जगहों पर खुले और अनधिकृत स्थानों पर गायों को काटने की तैयारियां की जा रही हैं।

Madras High Court: केवल वैध बूचड़खानों में ही हो सकेगा पशु कटान

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी जानवर का कटान केवल अधिकृत और कानूनी रूप से स्वीकृत बूचड़खानों में ही किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों, अस्थायी केंद्रों या बिना अनुमति वाले इलाकों में पशुओं का वध पूरी तरह नियमों के खिलाफ है।

Madras High Court: पुलिस और प्रशासन को नहीं है अस्थायी बूचड़खाने तय करने का अधिकार

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक पुलिस अधिकारी के हलफनामे पर नाराजगी जताई, जिसमें त्योहार के लिए अस्थायी बूचड़खानों की पहचान करने की बात कही गई थी। अदालत ने कहा कि पुलिस या कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को इस तरह के स्थान तय करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल नगर निगम और संबंधित वैधानिक संस्थाओं के पास ही होता है।

Madras High Court: सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी दिया हवाला

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। अदालत ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के कई लोग इस दिन अन्य जानवरों की कुर्बानी देते हैं और धार्मिक आस्था का पालन केवल गाय की कुर्बानी से जुड़ा नहीं माना जा सकता।

Madras High Court: संविधान के अनुच्छेद 48 का किया उल्लेख

पीठ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 का भी हवाला दिया। इस अनुच्छेद में राज्य को गायों, बछड़ों और अन्य उपयोगी मवेशियों के संरक्षण के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि केवल बेहद सीमित परिस्थितियों में ही कुछ पशुओं के कटान की अनुमति दी जा सकती है।

Madras High Court: कोर्ट ने गोवध प्रतिबंध को बताया कानूनसम्मत

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू गोवध प्रतिबंध कानून पूरी तरह वैध और संविधान के अनुरूप है। कोर्ट के मुताबिक यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था, डेयरी उत्पादन और पशु संरक्षण को ध्यान में रखकर बनाया गया है, इसलिए इसका सख्ती से पालन जरूरी है।

Madras High Court: अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी

मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) को निर्देश दिए हैं कि वे सभी जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें। अदालत ने कहा कि पूरे तमिलनाडु में इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और कहीं भी नियमों का उल्लंघन न होने दिया जाए।

read also: Weather Update: भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर, अगले 20 घंटों में 15 राज्यों में बारिश और तेज आंधी का अलर्ट

- Advertisement -
Ad imageAd image

MP: Top 10

MP: जानें प्रदेश की 10 बड़ी खबरें.. 1. भोपाल में बकरीद की

CG: Top 10

CG: जानें छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें.. 1. छत्तीसगढ़ में अगले दो

MP: Top 10

MP: जानें प्रदेश की 10 बड़ी खबरें.. 1. भोपाल में बकरीद की

Horoscope: जानें आज का राशिफल

Horoscope: हिंदू पंचांग के अनुसार कल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की द्वादशी और

Water Conservation : सदानीरा समागम’, जल गंगा संवर्धन,जल संरक्षण के लिए सांस्कृतिक आयोजन

Water Conservation : जल गंगा संवर्धन अभियान, बना जन आंदोलन ,राष्ट्रीय संगोष्ठी