Report: Imran khan
Chhatarpur प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सादगी अपनाओ’ मुहिम की अनदेखी करना मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं को बेहद भारी पड़ गया है। संगठन ने कड़ा रुख अपनाते हुए अनुशासनहीनता और वीआईपी कल्चर को बढ़ावा देने वाले नेताओं पर शिकंजा कस दिया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव सहित तीन बड़े नेताओं को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर तत्काल भोपाल तलब किया है।
Chhatarpur संतोषजनक जवाब न मिलने पर छिन सकता है पद
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव, पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पवन पाटीदार और सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल को 17 मई को भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का कड़ा आदेश दिया गया है। अनुशासन समिति के समक्ष इन नेताओं को अपनी सफाई में स्पष्टीकरण देना होगा। यदि नेताओं की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उन्हें अपने गरिमामयी पदों से हाथ धोना पड़ सकता है।
Chhatarpur क्यों आई रेखा यादव पर गाज? वीआईपी कल्चर पड़ा भारी
Chhatarpur छतरपुर से ताल्लुक रखने वाली राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव की मुश्किलें उनके गृह नगर आगमन के दौरान हुए एक घटनाक्रम से बढ़ी हैं:
- लग्जरी गाड़ियों का काफिला: छतरपुर आगमन पर रेखा यादव के स्वागत के लिए नियमों को ताक पर रखकर दर्जनों लग्जरी गाड़ियों का एक लंबा काफिला निकाला गया था।
- जनता को परेशानी: इस भारी-भरकम वीआईपी काफिले की वजह से पूरे छतरपुर शहर में घंटों तक भीषण जाम की स्थिति बनी रही, जिससे आम जनता और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
- मुहिम की अनदेखी: इस घटना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस मुहिम का सीधा उल्लंघन माना गया है, जिसमें उन्होंने जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों को सादगी अपनाने तथा जनता को परेशान न करने की सख्त हिदायत दी थी।
Chhatarpur संगठन का सख्त संदेश: अनुशासन सर्वोपरि
इस कार्रवाई से दिल्ली केंद्रीय मुख्यालय से लेकर मध्य प्रदेश संगठन तक स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि पार्टी में पद चाहे कितना भी बड़ा हो, अनुशासनहीनता और जनता के बीच गलत संदेश देने वाले ‘वीआईपी कल्चर’ को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कल होने वाली इस अहम सुनवाई पर अब पूरे राजनीतिक गलियारे की नजरें टिकी हुई हैं।





