Aaj Ka Panchang: 17 मई 2026, रविवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। आज प्रतिपदा तिथि शाम 09:40 बजे तक रहेगी, जिसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। यदि आप किसी नए कार्य की शुरुआत करना चाहते हैं, तो शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय जानना बेहद जरूरी है।
आज कृत्तिका नक्षत्र दोपहर 02:32 बजे तक रहेगा। इसके बाद चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करते हुए शुभ प्रभाव प्रदान करेंगे। सूर्योदय सुबह 05:29 बजे और सूर्यास्त शाम 07:06 बजे होगा।
आज का राहुकाल और शुभ मुहूर्त
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहुकाल में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। आज रविवार का राहुकाल शाम 05:24 बजे से 07:06 बजे तक रहेगा।
अगर आप कोई मांगलिक या नया कार्य शुरू करना चाहते हैं, तो राहुकाल के समय से बचकर शुभ मुहूर्त में कार्य करना बेहतर माना जाता है।
वाहन खरीदने का अगला शुभ मुहूर्त
अगर आप नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अगली शुभ तिथि 17 जून 2026 बताई गई है।
इसके अलावा पूरे साल में वाहन खरीदने के लिए कई शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। जनवरी, मार्च, जुलाई, अगस्त, सितंबर और दिसंबर के महीनों में कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।
विवाह के लिए अगला शुभ मुहूर्त
शादी-विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार अगला शुभ विवाह मुहूर्त 29 जून 2026 को रहेगा।
इसके अलावा फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई, जून, जुलाई और नवंबर-दिसंबर में भी कई शुभ विवाह मुहूर्त उपलब्ध हैं। विवाह से पहले कुंडली मिलान और शुभ समय का ध्यान रखना आवश्यक माना गया है।
घर खरीदने के लिए शुभ तिथि
अगर आप नया घर खरीदने की सोच रहे हैं, तो अगली शुभ तिथि 24 जून 2026 बताई गई है।
घर खरीदने और गृह प्रवेश के लिए जनवरी, फरवरी, मार्च, मई, जून, जुलाई, नवंबर और दिसंबर में कई शुभ दिन बताए गए हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ मुहूर्त में घर खरीदना सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
पंचांग का क्या होता है महत्व
हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। पंचांग पांच प्रमुख अंगों तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण से मिलकर बना होता है। इसी आधार पर शुभ-अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है।
किसी भी मांगलिक कार्य, विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद या धार्मिक अनुष्ठान से पहले पंचांग देखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
तिथि क्षय और वृद्धि का क्या अर्थ है
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी तिथि का क्षय या वृद्धि सूर्योदय के समय पर निर्भर करता है। यदि कोई तिथि सूर्योदय से पहले शुरू होकर अगले सूर्योदय तक बनी रहती है, तो उसे वृद्धि तिथि कहा जाता है।
वहीं यदि कोई तिथि सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि माना जाता है।
नक्षत्रों की संख्या कितनी होती है
वैदिक ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं। हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं और नौ चरण मिलकर एक राशि का निर्माण करते हैं।
नक्षत्रों का प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव, भाग्य और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर पड़ता है। इसलिए पंचांग में नक्षत्र की स्थिति को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।





