BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi : भारत सहित पूरी दुनिया के लिए साल 2026 पर्यावरण और मौसम के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है। अमेरिकी संस्था ‘राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन’ (NOAA) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अनुमानों ने चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर में एक अत्यंत शक्तिशाली ‘सुपर अलनीनो’ (Super El Niño) विकसित हो रहा है, जिसका असर मई 2026 से शुरू होकर फरवरी 2027 तक देखने को मिलेगा। इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, सूखा और कहीं विनाशकारी बाढ़ जैसी आपदाएं आ सकती हैं।
New Delhi क्या है ‘सुपर अलनीनो’ और क्यों कहा जा रहा है ‘राक्षस’?
अलनीनो, ‘अलनीनो-दक्षिणी दोलन’ (ENSO) जलवायु चक्र का गर्म चरण है, जिसमें उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है।
- तापमान में भारी वृद्धि: इस बार समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3.6 डिग्री फारेनहाइट (2 डिग्री सेल्सियस) तक बढ़ने का अनुमान है। यही वजह है कि मौसम विज्ञानी इसे अनौपचारिक रूप से ‘सुपर अलनीनो’ या ‘राक्षस’ कह रहे हैं।
- इतिहास दोहराने की आशंका: NOAA के अनुसार, अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच इसके ‘बेहद मजबूत’ श्रेणी में आने की 65% संभावना है। विशेषज्ञों को डर है कि यह साल 1877 के उस ऐतिहासिक अलनीनो जैसा विनाशकारी हो सकता है, जिसने वैश्विक अकाल को जन्म दिया था।
New Delhi भारतीय मौसम विभाग (IMD) की बढ़ी चिंता: कम मानसून का खतरा
New Delhi भारत में मानसून के रुख को लेकर विरोधाभासी स्थितियां बन रही हैं:
- जल्दी दस्तक, पर कम बारिश: IMD के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में अपनी सामान्य तिथि (1 जून) से पहले 26 मई, 2026 को ही दस्तक दे सकता है।
- दीर्घकालिक औसत (LPA) में कमी: शुरुआत जल्दी होने के बावजूद, मुख्य महीनों में अलनीनो के मजबूत होने से कुल बारिश कमजोर रहेगी। IMD ने इस साल मानसूनी बारिश के दीर्घकालिक औसत (LPA) का केवल 92% रहने का अनुमान जताया है, जो कि ‘सामान्य से कम’ की श्रेणी में आता है।
- सूखे का जोखिम: मौसम विभाग के अनुसार, सामान्य से कम वर्षा (LPA के 90% से कम) होने की 35% आशंका है। इसका सबसे बुरा असर देश के वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों (Rainfed Agriculture Zones) पर पड़ सकता है।
New Delhi ग्लोबल वॉर्मिंग ने आग में घी का काम किया
क्लाइमेट इमरजेंसी इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर और आईपीसीसी (IPCC) एक्सपर्ट पीटर डी कार्टर ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण धरती का तापमान पहले ही चरम पर है और अब मई से ही अलनीनो की शुरुआत हो चुकी है। यह स्थिति वैश्विक तापमान को वर्ष 2024 के सर्वकालिक रिकॉर्ड के बेहद करीब ले जा रही है, जिससे फसलों के उत्पादन और जल संकट पर गहरा असर पड़ेगा।
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