रिपोर्ट: संजीव कुमार शर्मा
Bhagalpur भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने का असर अब लोगों की सामाजिक परंपराओं और भावनाओं पर भी दिखने लगा है। पुल के जरिए यातायात बाधित होने के कारण गंगा पार करने का एकमात्र जरिया अब नाव ही रह गई है। आलम यह है कि शादी-ब्याह के इस सीजन में डोली या लग्जरी कारों की जगह अब नावों ने ले ली है।
Bhagalpur सड़कों पर जाम, गंगा की लहरों पर विदाई
विक्रमशिला सेतु के बंद होने से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। इसका सबसे भावुक और अनोखा नजारा गंगा घाटों पर देखने को मिल रहा है। नवविवाहित जोड़े अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कार या बस के बजाय नाव की सवारी से कर रहे हैं। घाटों पर विदाई का दृश्य अब पूरी तरह बदल गया है, जहाँ पानी की लहरों के बीच से दुल्हन अपने नए घर की ओर रवाना हो रही है।
Bhagalpur हाथों में सामान और जीवनसाथी का साथ
गंगा किनारे इन दिनों एक विशेष दृश्य आम हो गया है—दूल्हा एक हाथ में दुल्हन का सामान संभाले हुए है और दूसरे हाथ से अपनी जीवनसंगिनी का हाथ पकड़कर उसे सावधानी से नाव पर चढ़ा रहा है। भारी गहनों और शादी के जोड़े में सजी दुल्हनें भी रिश्तेदारों के बीच लहरों का जोखिम उठाते हुए नाव का सफर तय कर रही हैं। मुश्किलों के बावजूद रिश्तों को निभाने का यह जज्बा चर्चा का विषय बना हुआ है।
Bhagalpur सेतु क्षतिग्रस्त होने से बढ़ीं मुश्किलें
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुल के टूटने से सबसे ज्यादा परेशानी रोजमर्रा के कामगारों और उन परिवारों को हो रही है जिनके घरों में शादियां हैं। विदाई के लिए गाड़ियों का इंतजाम तो है, लेकिन पुल बंद होने के कारण वे गंगा के इस पार से उस पार नहीं जा पा रही हैं। मजबूरी में लोग जोखिम उठाकर नाव का सहारा ले रहे हैं। शासन-प्रशासन से जल्द से जल्द सेतु मरम्मत की मांग की जा रही है ताकि लोगों को इस समस्या से निजात मिल सके।
Read this: Sasaram में सियासी उबाल: TRE-4 अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज के विरोध में माले का प्रदर्शन, फूंका पुतला





