Report: Avinash Shrivastva
Sasaram बिहार के सासाराम जिले में टमाटर की बंपर पैदावार के लिए मशहूर नीमा और आसपास के गांवों के किसान इस समय गहरे आर्थिक संकट में हैं। एक निजी कंपनी के ‘दगाबाज’ बीज ने न केवल किसानों की उम्मीदें तोड़ी हैं, बल्कि उनकी कमर भी तोड़ दी है। भारी निवेश और सात महीने की हाड़तोड़ मेहनत के बाद जब फसल तैयार हुई, तो टमाटर का आकार देखकर किसानों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

Sasaram 150 ग्राम के बजाय 10 ग्राम का हुआ टमाटर
पीड़ित किसानों ने बताया कि उन्होंने टोकीटा सीड्स प्राइवेट इंडिया लिमिटेड नामक कंपनी के बीजों का उपयोग किया था। मानक के अनुसार, इस बीज से पैदा होने वाले टमाटर का वजन 100 से 150 ग्राम तक होना चाहिए था। लेकिन वास्तविकता में टमाटर महज 10 से 20 ग्राम (एक कंचे के बराबर) के ही रह गए हैं। सितंबर महीने में बोई गई फसल जब अप्रैल में कटाई के लिए तैयार हुई, तो खराब गुणवत्ता के कारण इसका कोई खरीदार नहीं मिल रहा है।
Sasaram लाखों की लागत डूबी, मेहनत निकालना भी मुश्किल
नीमा गांव के एक प्रगतिशील किसान ने बताया कि उन्होंने लगभग 6 एकड़ भूमि पर टमाटर की खेती की थी। उम्मीद थी कि लाखों रुपये की कमाई होगी, लेकिन अब स्थिति यह है कि मजदूरों की मजदूरी निकालना भी मुश्किल हो गया है। गुणवत्ता खराब होने के कारण बाजार में इस ‘बौने’ टमाटर की कोई कीमत नहीं मिल रही है।

Sasaram खेत में ही फसल सड़ाने को मजबूर किसान
भीषण तपिश और चिलचिलाती धूप के बीच किसान अपने खेतों में खड़ी बर्बाद फसल को देखकर सिर पीट रहे हैं। बाजार ले जाने का भाड़ा भी न निकलने के कारण किसानों ने अब टमाटर को खेत में ही सड़ने के लिए छोड़ दिया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कंपनी के दावों पर भरोसा किया था, लेकिन बीज की खराब गुणवत्ता ने उन्हें कर्ज के दलदल में धकेल दिया है।
Sasaram प्रशासन और कृषि विभाग से गुहार
प्रभावित किसानों ने जिला कृषि विभाग और प्रशासन से मांग की है कि इस बीज कंपनी के खिलाफ जांच की जाए और किसानों को हुए भारी आर्थिक नुकसान का उचित मुआवजा दिलाया जाए। किसानों का कहना है कि अगर कंपनियों की मनमानी पर लगाम नहीं कसी गई, तो वे भविष्य में खेती करने से डरेंगे।





