Report: Sartaj khan
Farrukhabad शुक्रवार को एआरटीओ कार्यालय फतेहगढ़ उस वक्त जंग का मैदान बन गया जब सुबह 10 बजे अचानक इंटरनेट कनेक्टिविटी फेल हो गई। इसके चलते नए लाइसेंस, फिटनेस और वाहन ट्रांसफर जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह ठप हो गए। घंटों इंतजार और अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से नाराज आवेदकों ने कार्यालय परिसर में जमकर हंगामा किया।
Farrukhabad कनेक्टिविटी फेल होने से मचा हड़कंप, फर्श पर बैठने को मजबूर हुए लोग
सुबह से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से आए आवेदक लाइनों में लगे थे, लेकिन सर्वर डाउन होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ा। भीषण गर्मी और बैठने की उचित व्यवस्था न होने के कारण लोग दफ्तर के फर्श पर ही लेटने और बैठने को मजबूर हो गए। दोपहर करीब 1 बजे जब इंटरनेट सेवा बहाल हुई, तो पहले काम कराने की होड़ में आवेदकों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी बहस हुई। एआरटीओ द्वारा सभी का काम पूरा होने तक दफ्तर खुला रखने के आश्वासन के बाद मामला शांत हो सका।
Farrukhabad बायोमेट्रिक तारीखों का ‘मायाजाल’: आवेदक परेशान
कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उस वक्त गंभीर सवाल खड़े हुए जब एक पीड़ित आवेदक ने मोबाइल पर आया मैसेज दिखाया। आवेदक को पहले 27 मार्च की तारीख दी गई थी, जिसे बदलकर 2 अप्रैल किया गया। ढाई घंटे लाइन में लगने के बाद फोटो काउंटर पर उसे बताया गया कि उसकी तारीख 1 अप्रैल थी।
- विवाद: मोबाइल पर 2 अप्रैल का आधिकारिक मैसेज होने के बावजूद कर्मचारी उसे ही गलत ठहराते रहे।
- अधिकारियों का रुख: जब पीड़ित ने एआरटीओ से गुहार लगाई, तो उसे सांत्वना देने के बजाय ‘नई तारीख लेकर दोबारा आने’ का टका सा जवाब दे दिया गया। ऐसे कई और आवेदक भी थे जिन्हें तकनीकी गड़बड़ी के कारण बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा।
Farrukhabad फाइलों के खेल और बाबू की कार्यशैली पर सवाल
वाहन ट्रांसफर काउंटर पर भी पारदर्शिता का अभाव देखने को मिला। आरोप है कि बाबू अरविंद चुनिंदा लोगों की फाइलें तो जमा कर रहे थे, लेकिन खुद काम कराने आए आम नागरिकों को ‘साहब के सिग्नेचर’ के नाम पर टरकाया जा रहा था।
बड़ा सवाल: आखिर किस सिस्टम के तहत कुछ विशेष लोगों की फाइलें पिछले दरवाजे से जमा की जा रही थीं? क्या प्रशासन इस तरह की मनमानी और वीआईपी कल्चर पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा?
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