FCRA Bill 2026 : विदेशी फंडिंग कानून में 6 बड़े बदलाव, संसद में जोरदार टकराव

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by: digital desk

FCRA Bill 2026 : नई दिल्ली, संसद के बजट सत्र के दौरान विदेशी अंशदान (विनियमन) कानून यानी FCRA में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी दलों ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया, जबकि सरकार ने इसे राष्ट्रीय हित से जुड़ा जरूरी कदम बताया।

FCRA Bill 2026
FCRA Bill 2026

विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस कानून के जरिए गैर-सरकारी संगठनों (NGO) पर नियंत्रण बढ़ाना चाहती है। वहीं सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना है।

FCRA Bill 2026 : क्या हैं प्रस्तावित 6 बड़े बदलाव?

  1. लोक सेवकों के लिए विदेशी फंडिंग पर पूर्ण रोक
    नए प्रावधानों के अनुसार सांसद, विधायक और सरकारी कर्मचारियों सहित सभी लोक सेवकों को विदेशी चंदा लेने से पूरी तरह रोका जाएगा।

विवाद: आलोचकों का कहना है कि “लोक सेवक” की परिभाषा काफी व्यापक है, जिससे शोधकर्ता या सलाहकार भी प्रभावित हो सकते हैं।

  1. NGO के बीच फंड ट्रांसफर पर प्रतिबंध
    अब कोई भी संस्था विदेशी फंड को दूसरी संस्था को ट्रांसफर नहीं कर सकेगी, भले ही दोनों के पास वैध रजिस्ट्रेशन हो। विवाद: इससे छोटे और जमीनी संगठनों को मिलने वाली सहायता बंद हो सकती है, जिससे ग्रामीण परियोजनाएं प्रभावित होंगी।
  2. प्रशासनिक खर्च की सीमा घटाई गई
    विदेशी फंड के प्रशासनिक उपयोग की सीमा 50% से घटाकर 20% कर दी गई है। विवाद: संगठनों का कहना है कि इससे स्टाफ की सैलरी और रिसर्च कार्य प्रभावित होंगे।
  3. आधार अनिवार्य
    रजिस्ट्रेशन या नवीनीकरण के लिए संस्था के पदाधिकारियों के लिए आधार देना जरूरी होगा। विवाद: इसे निजता के अधिकार से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं।
  4. केवल दिल्ली में बैंक खाता जरूरी
    अब विदेशी फंड प्राप्त करने के लिए सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक की नई दिल्ली शाखा में ही खाता खोलना होगा। विवाद: दूरदराज क्षेत्रों में काम करने वाले संगठनों के लिए यह प्रक्रिया मुश्किल भरी हो सकती है।
  5. सस्पेंशन अवधि बढ़ी
    सरकार अब किसी संस्था का लाइसेंस 180 दिन की जगह 360 दिन तक निलंबित कर सकती है।

विवाद: लंबे समय तक फंडिंग रुकने से संस्थाओं का काम ठप पड़ सकता है।

FCRA Bill 2026 : संसद के अंदर और बाहर विरोध

विधेयक को लेकर संसद में भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए इस कानून को वापस लेने की मांग की। शोर-शराबे के कारण लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों में स्थगित करनी पड़ी।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कदम एनजीओ की स्वतंत्रता को सीमित करने की कोशिश है।

FCRA Bill 2026 : सरकार का पक्ष

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस कानून का मकसद केवल राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी धर्म या संगठन को निशाना बनाने का इरादा नहीं है।

FCRA Bill 2026 : राजनीतिक टकराव तेज

FCRA संशोधन को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। एक तरफ सरकार इसे पारदर्शिता और सुरक्षा से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे संस्थाओं की स्वतंत्रता पर असर डालने वाला कदम बता रहा है। आने वाले दिनों में इस पर और बहस और सियासत देखने को मिल सकती है।

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