MP Promotion Reservation : मध्य प्रदेश में शुरू हुई सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों की पदोन्नति के मुद्दे ने प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नई बहस छेड़ दी है। तो वहीं कर्मचारियों की पदोन्नति के मुद्दे पर अजाक्स और सपाक्स आमने-सामने हैं।राज्य सरकार द्वारा नई पदोन्नति नीति लागू करने के बाद दोनों कर्मचारी संगठन अपने-अपने तर्कों के साथ अदालती और सार्वजनिक मंचों पर भिड़े हुए हैं। दरअसल प्रदेश में साल 2016 से पदोन्नति में आरक्षण का मामला न्यायालय में लंबित है। लंबे समय तक पदोन्नतियां रुकी रहने के बाद सरकार ने पदोन्नति नियम-2025 के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
MP Promotion Reservation : मध्यप्रदेश में नहीं रुकेंगे प्रमोशन, आमने-सामने आए कर्मचारी संगठन
पदोन्नति की प्रक्रिया जारी है, इस बीच हाईकोर्ट में प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई, लेकिन अदालत ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि सरकार अंतिम फैसले तक प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रख सकती है।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने माना कि सरकार के खिलाफ कोई लिखित रोक आदेश नहीं है, इसलिए प्रशासन पदोन्नति की तैयारियां जारी रख सकता है। कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 13 जुलाई तक का समय दिया। मामले में सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के संगठन सपाक्स ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार अपने पूर्व आश्वासनों से पीछे हट रही है और कर्मचारियों से वादाखिलाफी कर रही है।

MP Promotion Reservation : सपाक्स के सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप
सपाक्स का कहना है कि सरकार ने पहले न्यायालय के अंतिम निर्णय तक विवादित प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाने का भरोसा दिया था, लेकिन अब प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर उस वादे का उल्लंघन किया जा रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने विवादित नियमों के तहत पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाई तो आंदोलन और कानूनी लड़ाई दोनों जारी रहेंगे।
दूसरी ओर, पदोन्नति में आरक्षण के समर्थक कर्मचारी संगठन सरकार के कदम का समर्थन कर रहे हैं।उनका तर्क है कि वर्षों से लंबित पदोन्नतियों के कारण हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों का कैरियर प्रभावित हुआ है, इसलिए प्रक्रिया में और देरी उचित नहीं है।अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि मध्यप्रदेश में पदोन्नति की व्यवस्था किस स्वरूप में लागू होगी।
मध्यप्रदेश में एक बार फिर पदोन्नति (प्रमोशन) में आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक और कर्मचारी संगठनों के बीच विवाद का कारण बन गया है। सरकार द्वारा विभागों में प्रमोशन प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी के बीच सामान्य वर्ग और आरक्षित वर्ग के कर्मचारी संगठन आमने-सामने आ गए हैं।
MP Promotion Reservation : मध्यप्रदेश में नहीं रुकेंगे प्रमोशन, कर्मचारी संगठनों में तकरार
• हाईकोर्ट का प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार
• कहा- अंतिम फैसले तक प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रख सकती है सरकार
• सपाक्स ने कहा- सरकार वादाखिलाफी कर रही
• अंतिम निर्णय आने तक सरकार जारी रख सकती है पदोन्नति से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया
• पदोन्नति से जुड़े मामले का अंतिम निपटारा न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा
• संगठन की चेतावनी- विवादित नियमों के तहत पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाई
• आंदोलन और कानूनी लड़ाई दोनों जारी रहेंगे- सपाक्स
• हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने माना सरकार के खिलाफ कोई लिखित रोक आदेश नहीं है,
• प्रशासन पदोन्नति की तैयारियां जारी रख सकता है
• कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 13 जुलाई तक का समय दिया
• पदोन्नति प्रक्रिया में और देरी उचित नहीं है- अजाक्स
• वर्षों से लंबित पदोन्नतियों के कारण हजारों अधिकारियों,कर्मचारियों का कैरियर प्रभावित हुआ
MP Promotion Reservation : क्या है पूरा विवाद?
• राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में पदोन्नति की प्रशासनिक प्रक्रिया तेज की है।
• सामान्य वर्ग के कर्मचारी संगठन सपाक्स का आरोप है कि सरकार पूर्व आश्वासनों से पीछे हट रही है और आरक्षण संबंधी विवाद का अंतिम
न्यायिक फैसला आने से पहले प्रमोशन प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।
• वहीं अजाक्स सहित आरक्षित वर्ग के कर्मचारी संगठन लंबे समय से लंबित पदोन्नतियां जल्द किए जाने की मांग कर रहे हैं।
MP Promotion Reservation : हाईकोर्ट का रुख
• जबलपुर हाईकोर्ट ने फिलहाल प्रमोशन प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है।
• अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय तक सरकार प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रख सकती है, हालांकि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम फैसला बाद में होगा।
MP Promotion Reservation : अब आगे क्या?
• यदि सरकार प्रमोशन आदेश जारी करती है तो उस पर कानूनी चुनौती की संभावना बनी रहेगी।
• हाईकोर्ट के अंतिम फैसले से यह तय होगा कि प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था किस स्वरूप में लागू होगी।
• इस मुद्दे पर कर्मचारी संगठनों का विरोध और राजनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

