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पूर्व पीएम डॉ.मनमोहन सिंह का स्मारक बनाने के विवाद पर बड़ा अपडेट…

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Process of making statue of Manmohan Singh continues

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। उनके स्मारक पर राजनीतिक विवाद कई दिनों तक चलता रहा।कांग्रेस की मांग थी कि उनका जहां अंतिम संस्कार किया जाए उसी स्थान पर उनकी समाधि बनाई जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि शहरी कार्य मंत्रालय ने इसके निर्माण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। इसके तहत मनमोहन सिंह के परिवार को स्थल के चयन के लिए तीन विकल्प सुझाए गए हैं।


सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्मृति स्थल राजघाट, किसान घाट व समता स्थल के तीन विकल्प दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के परिवार को दिए गए हैं और उनसे इनमें से एक का चयन करने को कहा गया है। यह प्रस्ताव शहरी कार्य मंत्रालय को मिली इस सूचना के बाद दिया गया है कि, मनमोहन सिंह की स्मृतियों को स्मारक के रूप में संजोने के लिए ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

परिवार के सदस्य ही करेंगे निर्णय

स्मारक लिए ट्रस्ट के आवेदन पर डेढ़ एकड़ जमीन आवंटित की जाएगी। मनमोहन सिंह की स्मृति में बनाए जाने वाले ट्रस्ट में कौन शामिल होगा, इसका निर्णय परिवार के सदस्य ही करेंगे। सूत्रों के अनुसार, इसमें पार्टी के कुछ सदस्य भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन यह निर्णय पूरी तरह मनमोहन सिंह की पत्नी गुरुशरण सिंह और उनकी पुत्रियों द्वारा लिया जाएगा। पार्टी ट्रस्ट के गठन में पूरी सहायता करेगी।

मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर को हो गया था और उनका अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर 28 दिसंबर को किया गया था। अंतिम संस्कार राजघाट या समता स्थल पर नहीं कराए जाने को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर एकमात्र सिख प्रधानमंत्री का अपमान करने का आरोप लगाया था, जबकि सरकार ने कांग्रेस पर मनमोहन सिंह के नाम पर संकीर्ण राजनीति करने का आरोप लगाते हुए यह स्पष्ट कर दिया था कि स्मारक का निर्माण ट्रस्ट के गठन की अनिवार्य औपचारिकता के बाद ही होगा।

छह महीने में बनकर तैयार हो जाएगा स्मारक

माना जा रहा है कि सब कुछ सही रहा तो मनमोहन सिंह का स्मारक छह महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। स्मारक का निर्माण सीपीडब्ल्यूडी द्वारा किया जाएगा, लेकिन इसका खर्च ट्रस्ट को उठाना होगा। ट्रस्ट ही उसके रखरखाव का खर्च भी वहन करेगा।
ट्रस्ट के नाम पर होगा, लेकिन जमीन का स्वामित्व शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन आने वाले भूमि एवं विकास विभाग के पास बना रहेगा। सीपीडब्ल्यूडी निर्माण की प्रक्रिया और उसमें आने वाली लागत आदि का प्रस्ताव इस विभाग के साथ ही ट्रस्ट के साथ साझा करेगा।

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