Report: Vandna Rawat
Ayodhya चैत्र नवरात्रि और हिंदू नव वर्ष (नव संवत्सर) के पावन अवसर पर धर्मनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी। गुरुवार को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल पर विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ‘श्रीराम यंत्र’ की प्रतिष्ठापना की। इस दौरान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद रहे।
Ayodhya रामलला के चरणों में झुकाया शीश
राष्ट्रपति मुर्मु ने रामलला के भव्य मंदिर में पहुंचकर भगवान के दर्शन किए और आरती उतारकर अपनी श्रद्धा निवेदित की। राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर के अन्य देवों के समक्ष भी शीश झुकाया। इस दौरान राष्ट्रपति ने मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई अद्भुत कलाकृतियों और वास्तुकला का बारीकी से अवलोकन किया, जिसकी उन्होंने काफी सराहना भी की।

Ayodhya क्या है ‘श्रीराम यंत्र’ का महत्व?
मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित किया गया यह श्रीराम यंत्र विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है:
- आगमन: यह यंत्र दो वर्ष पूर्व जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या भेजा गया था।
- विशेषता: वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित इस यंत्र को देवताओं का निवास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह यंत्र सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने की अद्भुत क्षमता रखता है।
- अनुष्ठान: इस प्रतिष्ठापना के लिए दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के विद्वान आचार्यों द्वारा पिछले नौ दिनों से विशेष वैदिक अनुष्ठान किया जा रहा था।
Ayodhya संतों और गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति
यंत्र प्रतिष्ठापना के इस पुनीत अवसर पर अध्यात्म जगत की प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहीं। इनमें मां अमृतानंदमयी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और सदस्य गोपाल जी प्रमुख थे। पूज्य संतों के सानिध्य में हुए इस आयोजन ने चैत्र नवरात्रि के उल्लास को और भी बढ़ा दिया है।





