By: Pramod Shrivastava
swadesh Ajenda बंगाल में राष्ट्रपति के अपमान की, चुनावी साल में बढ़े सियासी तापमान की। चुनावी साल में बंगाल में बवाल की, और राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल पर सवाल की। बंगाल के विधानसभा चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं रहा गया है। ऐसे में तमाम राजनीतिक दलों के नेता बंगाल में डेरा जमाए हुए हैं। ममता जहां सत्ता में वापसी के लिये जोर लगा रही है तो वहीं भाजपा का दावा सत्ता परिवर्तन का है। लेकिन वार पलटवार के बीच ऐंट्रीं आदिवासी के मुद्दे पर है। और आदिवासी भी कोई छोटा मोटा नहीं बल्कि देश के सर्वोच्च पद पर आसीन राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू।

swadesh Ajenda जिनके प्रोटोकॉल और अपमान पर मोदी-ममता के बीच सियासी संग्राम तेज है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान देश की गरिमा के खिलाफ बताया है। तो वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी तमाम आरोप भाजपा और प्रधानमंत्री पर लगाते हुए राष्ट्रपति को चुनावी राजनीति में घसीटने की बात कह रही हैं। अब राष्ट्रपति के सम्मान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर केंद्र और राज्य के बीच टकराव है। सियासी तापमान बढ़ा हुआ है। ऐसे में इस मुद्दे की गूंज का सियासी और चुनावी असर क्या होगा ? ये देखने वाली बात होगी।। फिलहाल ये मुद्दा देश के लेकर बंगाल की राजनीति में छाया हुआ है। और राजनीतिक माहौल गर्म है।
swadesh Ajenda पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। ऐसे में बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी तापमान बढ़ा हुआ है। चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल में ‘अपमान’ का मामला गरमाया हुआ है, राष्ट्रपति के अपमान को लेकर ममता और मोदी सीधे सीधे एक दूसरे पर हमलावर हैं।
हवाला बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन और राज्य मंत्रियों की गैरमौजूदगी का है। सिलीगुड़ी में ‘अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन’ का स्थान अचानक बदल दिया गया, जिससे राष्ट्रपति ने खुद नाराजगी जाहिर की। राष्ट्रपति की नाराजगी के बाद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे आदिवासी समुदाय और संवैधानिक पद का ‘घोर अपमान’ बताया है।
swadesh Ajenda उन्होंने इसे राष्ट्रपति का अपमान बताते हुए कहा कि बंगाल की जनता और नारी-शक्ति आदिवासी नेता के इस तिरस्कार के लिए टीएमसी को माफ नहीं करेगी। पीएम मोदी ने कहा कि अहंकारी व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो उसका अहंकार नष्ट हो जाता हैं। एक आदिवादी राष्ट्रपति का घोर अपमान करने वाली पार्टी का अपमान चूर-चूर होकर रहेगा।
नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री
उधर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया। कहा कि प्रोटोकॉल का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। बीजेपी राष्ट्रपति को राजनीति में घसीट रही है। भाजपा राष्ट्रपति को अपना “एजेंडा चलाने” के लिए बंगाल भेज रही है। ममता बनर्जी ने एक पुरानी तस्वीर भी साझा की।
swadesh Ajenda फिलहाल केंद्रीय गृह सचिव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन और सुरक्षा में कथित खामियों को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्य से जवाब तलब किया है। लेकिन विवाद सिर्फ राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल तक ही नहीं बल्कि वॉशरूम में पानी न होना या रास्ते पर कचरा होना जैसी शिकायतों पर भी राजनीतिक बहस बढ़ी हुई है। तो वहीं मामले में अगल अलग राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

बहरहाल अब राष्ट्रपति के अपमान पर राजनीतिक घमासान है। बीजेपी ने इस मुद्दे को बंगाल चुनाव में आदिवासी अस्मिता और महिला सम्मान से जोड़ दिया है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह अपनी ‘परिवर्तन यात्रा’ के दौरान राष्ट्रपति के इस कथित अपमान को चुनावी अभियान का मुख्य मुद्दा बनाएगी, विशेषकर आदिवासी बहुल जिलों में। ऐसे में आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि बंगाल में पहले से ही सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।
ऐसे में राष्ट्रपति से जुड़े इस मुद्दे ने राज्य की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। अब सवाल यही है कि क्या यह विवाद महज बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा, या आने वाले दिनों में बंगाल और देश की राजनीति में नया सियासी तूफान खड़ा करेगा। ये देखने वाली बात होगी।
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