IndiaFrance DefenseDeal : मेक इन इंडिया के तहत राफेल से जेट इंजन तक, रणनीतिक साझेदारी को नई उड़ान

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IndiaFrance DefenseDeal

by: Pramod Shrivastava

IndiaFrance DefenseDeal : भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंध पिछले कुछ दशकों में रणनीतिक साझेदारी के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बनकर उभरे हैं। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ा दिया है। इस साझेदारी के तहत लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों और मिसाइलों के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक और अरबों डॉलर के समझौते हुए हैं। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा अनुसंधान, इंजन तकनीक, सेंसर सिस्टम और एडवांस मटीरियल पर संयुक्त काम को लेकर भी कई सहयोग समझौते किए गए हैं। भारत-फ्रांस के बीच रक्षा समझौतों में ट्रांसफर ऑफ टेक्नॉलोजी और ‘मेक इन इंडिया’ का पहलू सबसे क्रांतिकारी है।

फ्रांस अब केवल भारत को हथियार बेचने वाला देश नहीं, बल्कि भारत में रक्षा उपकरणों का ‘सह-विकास’ करने वाला प्रमुख भागीदार बन गया है। बात भारत और फ्रांस के बीच हुए प्रमुख और ऐतिहासिक रक्षा समझौतों की बात करें तो राफेल विमानों की खरीद भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। अब नए समझौते के तहत, राफेल केवल एक आयातित लड़ाकू विमान नहीं रहा, बल्कि स्वदेशी का लक्ष्य भी भारत पूरा कर रहा है। दोनों देश मिलकर नए जमाने के इंजन, मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर, मॉर्डन फाइटर जेट्स और पनडुब्बियां बनाने पर काम कर रहे हैं। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से एक शक्तिशाली जेट इंजन बनाना रही है। फ्रांस इसमें सबसे बड़ी मदद कर रहा है।

IndiaFrance DefenseDeal : बात यदि भारत फ्रांस के बीच महत्वपूर्ण रक्षा सौदे की करें तो…

114 राफेल लड़ाकू विमान (MRFA) :-
• भारतीय वायुसेना के लिए ₹3.25 लाख करोड़ के मेगा सौदे को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की मंजूरी।
• इसमें से 96 विमान ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में ही बनाए जाएंगे।
26 राफेल-एम (नौसेना संस्करण)
• अप्रैल 2025 में भारत ने विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत के लिए लगभग
• 63,000 करोड़ का सौदा साइन किया, इनकी डिलीवरी 2029 से शुरू होकर 2031 तक पूरी होगी।
पनडुब्बी सहयोग
• ‘प्रोजेक्ट 75’ के तहत छठी स्कॉर्पीन पनडुब्बी ‘वागशीर’ जनवरी 2025 में नौसेना को सौंपी गई।
• इसके अलावा, तीन अतिरिक्त उन्नत कलवरी क्लास पनडुब्बियों के संयुक्त निर्माण पर बातचीत जारी है।
हेलीकॉप्टर निर्माण
• टाटा और एयरबस ने कर्नाटक में H-125 हेलीकॉप्टर की असेंबली लाइन शुरू की है।
• जो भारत की पहली निजी क्षेत्र की हेलीकॉप्टर निर्माण इकाई है।
इंजन और मिसाइल तकनीक
• फ्रांस की कंपनी सफ्रान (Safran) भारत में जेट इंजनों के लिए MRO सुविधा स्थापित कर रही है।
हैमर (HAMMER) मिसाइलों का निर्माण
• भारत में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ मिलकर किया जाएगा।
• दोनों के देशों की कंपनियों के बीच 50:50 की पार्टनरशिप में हैमर मिसाइल बनाने का फैसला ।
• स्कैल्प (SCALP) मिसाइल – 2026 में 400 स्कैल्प मिसाइलों की खरीद को भी मंजूरी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोनों देशों के रिश्तों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर पर ले जाने की घोषणा की है।पीएम मोदी ने कहा कि आज के अशांत युग में भारत-फ्रांस की साझेदारी वैश्विक स्थिरता के लिए एक शक्ति है।उन्होंने दोनों देशों के रिश्ते को परिभाषित करते हुए कहा कि हमारी दोस्ती की कोई सीमा नहीं है और यह गहरे समुद्र से लेकर सबसे ऊंचे पहाड़ों तक फैली हुई है। उन्होंने जोर दिया कि नवाचार अलग-थलग रहने से नहीं बल्कि सहयोग से आता है, विशेषकर रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश सिर्फ व्यापार या हथियारों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सुरक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष, समुद्री इलाकों की सुरक्षा और बड़े वैश्विक मुद्दों पर साथ मिलकर काम करेंगे।उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस जमीन, समुद्र और आसमान हर सेक्टर में अपनी इच्छा और भरोसे के साथ एक-दूसरे के साथ खड़े हैं। तो वहीं फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के साथ रक्षा संबंधों को एक विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने की घोषणा की। मैक्रों ने कहा कि यह सिर्फ रक्षा सौदों तक सीमित बात नहीं है, बल्कि यह दो बड़े देशों की मजबूत साझेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस जमीन, समुद्र और आसमान हर सेक्टर में अपनी इच्छा और भरोसे के साथ एक-दूसरे के साथ खड़े हैं।

मैक्रों ने फ़्रांस को ‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक अटूट भागीदार बताया। कहा कि दोनों देशों का रक्षा सहयोग केवल एक अनुबंध नहीं, बल्कि संप्रभु गठबंधन है, जहां दो महान राष्ट्र एक-दूसरे को अपनी इच्छा और दृढ़ विश्वास से चुनते हैं। इमैनुअल मैक्रों ने इस दौरान स्पेस सेक्टर का भी जिक्र करते हुए कहा कि भारत में सिविल और न्यूक्लियर सेक्टर में भी कई पहल चल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इनोवेशन का मतलब सिर्फ बड़ी तकनीकी उपलब्धियां नहीं होता, बल्कि इसका मकसद आम लोगों की जिंदगी को बेहतर, और सुरक्षित बनाना भी है। मैक्रों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-फ़्रांस संबंध विश्वास, खुलेपन और महत्वाकांक्षा पर आधारित हैं।

चीन और पाकिस्तान की ओर से उभरती ‘दोहरे मोर्चे’ की सैन्य चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए भारत वर्तमान में अपनी रणनीतिक शक्ति और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ऐसे में यह रक्षा सहयोग चीन और पाकिस्तान की सैन्य चुनौतियों का जवाब देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह साझेदारी क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को भारत के पक्ष में मजबूती को दिखाती है।

• एयर डिफेंस में मजबूती – राफेल की मिटीयोर और हैमर जैसी मिसाइलें चीन और पाकिस्तान के किसी भी विमान से अधिक मारक क्षमता रखती हैं, जिससे भारत को अपनी सीमा के भीतर रहते हुए दुश्मन को निशाना बनाने की शक्ति मिलती है।
• हिंद महासागर में दबदबा – राफेल-एम और नई पनडुब्बियों की तैनाती से हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सक्रियता और पाकिस्तान की नौसैनिक घेराबंदी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।
• तकनीकी आत्मनिर्भरता – फ्रांस द्वारा जेट इंजन और मिसाइल तकनीक के हस्तांतरण (ToT) से भारत की दूसरे देशों पर निर्भरता कम होगी, जिससे लंबी अवधि के संघर्षों में भारत अधिक सक्षम बनेगा।

बहरहाल अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नियमित उच्चस्तरीय मुलाकातों के बाद भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को राजनीतिक स्थिरता और दीर्घकालिक दिशा मिली है। भारत-फ्रांस रक्षा समझौते केवल हथियार खरीद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, संयुक्त अभ्यास और लॉजिस्टिक सहयोग को भी मजबूती देते हैं। भारत-फ्रांस के रक्षा समझौते आज सिर्फ रक्षा खरीद नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक तैयारी, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक सुरक्षा भूमिका को मजबूत करने का आधार बन चुके हैं।कुल मिलाकर, यह डील सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता की कहानी है। मेक इन इंडिया के तहत अब हम फ्रांस की टेक्नोलॉजी से अपने हथियार बनाएंगे, जो डिफेंस एक्सपोर्ट को बूस्ट तो देगी हीं साथ ही स्वदेशी के संकल्प को पूरा होने में मददगार भी साबित होगी।

IndiaFrance DefenseDeal : 26 राफेल-मरीन (Rafale-M) सौदा (2025)

• अप्रैल 2025 में भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन विमानों की खरीद के लिये 63 हजार करोड़ का अंतर-सरकारी समझौता (IGA) हुआ।
• ये विमान INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य जैसे विमानवाहक पोतों पर तैनात किए जाएंगे।

IndiaFrance DefenseDeal : 36 राफेल विमानों का पहला सौदा (2016)

• 2016 में भारत ने वायुसेना के लिए 58,891 करोड़ रुपये में 36 राफेल विमानों का सौदा किया था, जिनकी डिलीवरी 2022 तक पूरी हो गई।

IndiaFrance DefenseDeal : छह स्कर्पीन पनडुब्बियां (2005)

• समुद्री सुरक्षा में सहयोग, प्रोजेक्ट-75 के तहत बड़ी उपलब्धि हासिल की।
• 2005 में 18,798 करोड़ का समझौता हुआ था।
• इस परियोजना की छठी और अंतिम पनडुब्बी, INS वाघशीर को।
• 15 जनवरी 2025 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।

IndiaFrance DefenseDeal : अतिरिक्त पनडुब्बियां

• भारत और फ्रांस ने पनडुब्बी सहयोग जारी रखने की पुष्टि की है
• जिसमें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और फ्रांस का
• नेवल ग्रुप मिलकर तीन और नई कलवरी-श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण कर सकते हैं।

IndiaFrance DefenseDeal : राफेल लड़ाकू विमान सौदे

• 114 राफेल विमानों की नई मेगा डील
• भारत ने 114 और राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी है।
• जिसकी अनुमानित लागत 3.25 लाख करोड़ से 3.5 लाख करोड़ के बीच है।
• समझौते की खास बात यह है कि 114 में से 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे।
• जिनमें 60% स्वदेशी कलपुर्जे इस्तेमाल होंगे।

IndiaFrance DefenseDeal : हैमर (HAMMER) मिसाइल

• भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और फ्रांसीसी कंपनी Safran के बीच समझौता।
• भारत में ही इन मिसाइलों के निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम (JV) का समझौता।
• दोनों के देशों की कंपनियों के बीच 50:50 की पार्टनरशिप में हैमर मिसाइल बनाने का फैसला ।
• स्कैल्प (SCALP) मिसाइल – 2026 में 400 स्कैल्प मिसाइलों की खरीद को भी मंजूरी।

IndiaFrance DefenseDeal : सबमरीन (Scorpene)

• प्रोजेक्ट-75 के तहत तीन और कलवरी श्रेणी की स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के निर्माण पर सहमति बनी है।

हेलीकॉप्टर निर्माण

• टाटा और एयरबस मिलकर कर्नाटक के वेमगल में H125 हेलीकॉप्टरों की असेंबली लाइन स्थापित कर रहे हैं।
• यह दुनिया का एकमात्र ऐसा हेलीकॉप्टर होगा जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ सकेगा।

IndiaFrance DefenseDeal : इंजन निर्माण और तकनीक हस्तांतरण

• फ्रांस की कंपनी सैफरान भारत के स्वदेशी ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ के लिए 110kN शक्ति वाला इंजन विकसित करने में मदद कर रही है।
• जेट इंजन को-प्रोडक्शन- सैफरान और HAL मिलकर लड़ाकू विमानों के इंजनों के को-डिजाइन और को-प्रोडक्शन पर काम कर रहे हैं।
• MRO सुविधा – हैदराबाद में नवंबर 2025 में विमान इंजनों के लिए भारत का पहला डीप-लेवल मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) केंद्र स्थापित किया गया है।
• हॉरिजॉन 2047 – यह रोडमैप 2047 तक दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करता है।
• जो भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी की 50वीं वर्षगांठ का प्रतीक होगा।
• फ्रांस भारत के साथ ‘मिशन कंप्यूटर’ और ‘रडार तकनीक’ के गोपनीय सोर्स कोड साझा करने पर सहमति।
• भारत और फ्रांस मिलकर समुद्र की निगरानी के लिए उपग्रहों का एक समूह विकसित कर रहे हैं।
• इसमें सैन्य उपग्रहों के लिए उन्नत सेंसर तकनीक साझा की जा रही है।

IndiaFrance DefenseDeal : अन्य महत्वपूर्ण समझौते और रणनीतिक क्षेत्र

रक्षा के अलावा, ‘होराइजन 2047’ (Horizon 2047) रोडमैप के तहत निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया गया है:
इनोवेशन और टेक्नोलॉजी: वर्ष 2026 को “भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष” घोषित किया गया है। डिजिटल विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए नए केंद्रों की स्थापना की जाएगी।

महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals): स्वच्छ ऊर्जा और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए दुर्लभ खनिजों और धातुओं की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने हेतु समझौता हुआ है। अंतरिक्ष सहयोग: गगनयान मिशन और अन्य वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपणों के लिए फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी (CNES) और ISRO के बीच सहयोग जारी है। नागरिक परमाणु ऊर्जा: जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना में तेजी लाने और छोटे मॉड्यूल रिएक्टर (SMRs) पर सहयोग की दिशा में प्रगति हुई है। आर्थिक सुधार: व्यापार को बढ़ावा देने के लिए दोहरे कराधान से बचाव समझौते (DTAA) के प्रोटोकॉल में संशोधन पर सहमति बनी है।

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग अब सिर्फ हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह “सह-विकास” और “मेक इन इंडिया” मॉडल में तब्दील हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रिश्तों को “स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के स्तर तक पहुंचाया है, जिससे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा और तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिली है।

114 राफेल की मेगा डील

भारत ने 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) के लिए लगभग 3.25 से 3.5 लाख करोड़ रुपये की मेगा डील को मंजूरी दी है। खास बात यह है कि इनमें से 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे और लगभग 60% स्वदेशी कलपुर्जों का इस्तेमाल होगा। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

नौसेना के लिए 26 राफेल-M

अप्रैल 2025 में 63 हजार करोड़ रुपये के अंतर-सरकारी समझौते के तहत भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई। ये विमान INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य पर तैनात होंगे, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक क्षमता मजबूत होगी।

पनडुब्बी सहयोग

प्रोजेक्ट-75 के तहत छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण बड़ी उपलब्धि रहा है। जनवरी 2025 में INS वाघशीर को नौसेना में शामिल किया गया। इसके अलावा तीन और उन्नत कलवरी-श्रेणी पनडुब्बियों के संयुक्त निर्माण पर सहमति बनी है।

जेट इंजन और तकनीकी हस्तांतरण

फ्रांस की कंपनी Safran भारत के स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए 110kN इंजन विकसित करने में सहयोग कर रही है। Safran और HAL मिलकर को-डिजाइन और को-प्रोडक्शन पर काम कर रहे हैं। हैदराबाद में डीप-लेवल MRO सुविधा भी स्थापित की जा रही है।

फ्रांस द्वारा रडार और मिशन कंप्यूटर के सोर्स कोड साझा करने की सहमति तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

मिसाइल निर्माण में साझेदारी

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और Safran के बीच 50:50 संयुक्त उद्यम के तहत HAMMER मिसाइलों का निर्माण भारत में होगा। साथ ही 2026 में 400 SCALP मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी गई है।

‘होराइजन 2047’ रोडमैप

Horizon 2047 के तहत रक्षा के अलावा अंतरिक्ष, AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और नागरिक परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाया जा रहा है। गगनयान मिशन और जैतापुर परमाणु परियोजना में भी प्रगति हुई है।

रणनीतिक संदेश

चीन और पाकिस्तान की दोहरे मोर्चे की चुनौतियों के बीच यह रक्षा साझेदारी भारत की वायु, समुद्री और तकनीकी शक्ति को नई मजबूती देती है। राफेल की मेटीयोर और हैमर मिसाइलें एयर डिफेंस को सशक्त बनाती हैं, जबकि नई पनडुब्बियां हिंद महासागर में संतुलन बनाए रखने में मदद करेंगी।

कुल मिलाकर, भारत-फ्रांस रक्षा डील केवल सौदा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की रणनीतिक नींव है—जहां तकनीक का हस्तांतरण, संयुक्त उत्पादन और दीर्घकालिक सहयोग भारत को वैश्विक रक्षा मानचित्र पर मजबूत बनाता है।

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