Anganwadi News MP : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मधुमक्खी हमले से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया, ₹4 लाख सहायता देने के दिए निर्देश

- Advertisement -
Swadesh NewsAd image
Anganwadi News MP

by: vijay nandan

Anganwadi News MP : भोपाल, मध्य प्रदेश के नीमच जिले के ग्राम रानपुर में मधुमक्खियों के डंक से आंगनवाड़ी में कार्यरत कंचन बाई मेघवाल के असमय निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इस घटना को अत्यंत दुखद और हृदयविदारक बताया।

Anganwadi News MP : सीएम डॉ. यादव ने परिजन को 4 लाख रु. की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार इस दुःख की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने मानवीय आधार पर कंचन बाई मेघवाल के परिजनों को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि दिवंगत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिवार को यह अपार दुःख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। इस घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है और ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।

Anganwadi News MP : सेवा, साहस और बलिदान की मिसाल बनी कंचनबाई मेघवाल

नीमच जिले के जावद विकासखंड अंतर्गत ग्राम रानपुर की यह घटना हादसा तो है ही, बल्कि इंसानियत और साहस की एक ऐसी मिसाल है, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। स्व सहायता समूह की अध्यक्ष और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहीं कंचनबाई मेघवाल गांव में एक जिम्मेदार, संवेदनशील और बच्चों के प्रति बेहद स्नेह रखने वाली महिला के रूप में जानी जाती थीं।

सोमवार दोपहर आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर अचानक मधुमक्खियों के हमले से अफरा-तफरी मच गई। उस वक्त कंचनबाई पास ही हैंडपंप पर थीं। बच्चों की चीखें सुनते ही उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना मदद के लिए दौड़ लगाई। दरी और कंबल को ढाल बनाकर बच्चों को सुरक्षित निकालना उनका अंतिम कार्य साबित हुआ।

ग्रामीणों के अनुसार, यदि कंचनबाई समय पर आगे नहीं आतीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने जिस साहस और ममता से बच्चों को बचाया, वही उनकी पहचान बन गई। प्रशासनिक जांच जारी है, लेकिन गांव और क्षेत्र में कंचनबाई का यह बलिदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा।